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Magh Mela : पुण्यकारी रविपुष्य योग, चतुर्ग्रहीय संयोग में लगेगी माघी पूर्णिमा की डुबकी, कब से कब तक है स्नान का पुण्यकाल?

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 25 Jan 2026 04:52 PM (IST)

प्रयागराज में माघ मेला के पाँचवें स्नान पर्व, माघी पूर्णिमा का भक्तों को इंतजार है। इस दिन संगम तट पर ...और पढ़ें

प्रयागराज माघी पूर्णिमा पर रविपुष्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, ज्योतिषियों ने स्नान का पुण्यकाल व महत्व बताया है।

प्रयागराज माघी पूर्णिमा पर रविपुष्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है, ज्योतिषियों ने स्नान का पुण्यकाल व महत्व बताया है। 

HighLights

  1. पूर्णिमा के दिन ही एक फरवरी को माघ मेला का कल्पवास संपन्न होगा

  2. घर-गृहस्थी में लौट जाएंगे कल्पवासी तो मठ और मंदिरों में जाएंगे संत

  3. इसी दिन शुकोदय के बाद शादी-विवाह आदि समस्त शुभ कार्य आरंभ होंगे

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। आध्यात्मिक ऊर्जा से दमक रही है संगम की रेती। संतों और कल्पवासियों के शिविरों में भजन-कीर्तन, अनुष्ठान चल रहा है। हर किसी को प्रतीक्षा है माघ मेला के पांचवे स्नान पर्व माघी पूर्णिमा की। माघ शुक्लपक्ष की पूर्णिमा अर्थात माघी पूर्णिमा स्नान पर्व निकट है।

पूर्णिमा से माघ मेला में यज्ञ-अनुष्ठान पर लगेगा विराम 

माघी पूर्णिमा इस स्नान के साथ संगम तट पर चल रहे यज्ञ-अनुष्ठान पर विराम लग जाएगा। संत मठ-मंदिरों में जाएंगे। कल्पवासी अगले वर्ष पुन: आने का संकल्प लेकर घर-गृहस्थी में लौट जाएंगे। माघी पूर्णिमा पर स्नान-दान का विशेष महत्व है। ग्रह-नक्षत्रों के मिलन से रविपुष्य योग और चतुर्ग्रहीय संयोग में पूर्णिमा की डुबकी लगेगी।

पुण्यकारी संयोग में होगा स्नान : आचार्य देवेंद्र 

ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार एक फरवरी की सुबह 5.19 बजे पूर्णिमा तिथि लग जाएगी। जो उक्त तारीख की रात 3.46 बजे तक रहेगी। रविपुष्य का योग दिनभर रहेगा। वहीं, मकर राशि में मंगल, बुध, शुक्र और सूर्य के संचरण से चतुर्ग्रहीय संयोग बन रहा है। जो अत्यंत पुण्यकारी है। एक फरवरी की शाम 6.05 बजे शुक्रोदय होगा। इसके साथ शादी-विवाह सहित समस्त शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे।

खास-खास

- मेला का पांचवा स्नान पर्व माघी पूर्णिमा एक फरवरी को होगा। रविपुष्य के साथ मकर राशि में मंगल, बुध, शुक्र व सूर्य संचरण करेंगे।

- रविपुष्य योग और चतुर्ग्रहीय योग का अद्भत संयोग होने से स्नान पर्व का महत्व बढ़ गया है। 

देवता भी स्नान करने आते हैं पृथ्वी पर

पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार मत्स्य पुराण में वर्णन है कि माघ मास की पूर्णिमा तिथि पर स्वर्ग लोक से देवता पृथ्वी पर आते हैं। वे मनुष्य के स्वरूप में संगम में स्नान करते हैं। संगम व गंगा के पवित्र जल में स्नान करके गरीबों को भोजन, वस्त्र, गुड़, कपास, देशी घी, फल व अन्न दान करने वालों को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। जीवन में सुख-समृद्धि आती है। माघी पूर्णिमा पर स्नान के बाद जल ग्रहण करना चाहिए। आहार, विहार व आचरण शुद्ध रखें। रात में जल में सफेद फूल डालकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से मनोवांछित फल की प्राप्त होती है।

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