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प्रयागराज-कौशांबी में यमुना से बालू के अवैध खनन में किसकी शह और किसका साथ? झकझोरने से भी नहीं रुक रहा 'गोरखधंधा'

By shyam mishra Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 12 Apr 2026 03:30 PM (IST)

प्रयागराज और कौशांबी में यमुना नदी में बालू का व्यापक रूप से अवैध खनन जारी है। 400 से अधिक स्थानों ...और पढ़ें

कौशांबी जिले के मल्हीपुर, नंदा का पूरा में डंप बालू को हटाता पोकलैंड। जागरण

कौशांबी जिले के मल्हीपुर, नंदा का पूरा में डंप बालू को हटाता पोकलैंड। जागरण

HighLights

  1. यमुना में व्यापक स्तर पर अवैध खनन कर पास के गांवों में करा रहे बालू का भंडारण

  2. बाग-बगीचों से लेकर खेतों और सड़क के किनारे पर कब्जा कर रखवा दिया गया बालू

  3. सफेदपोश से लेकर पासरगैंग तक सक्रिय, दिन के उजाले में भी मशीनों से हो रहा खनन

जागरण संवाददाता, प्रयागराज/कौशांबी। यमुना नदी से सिर्फ अवैध खनन बालू माफिया के अकेले के बस का नहीं है। कौशांबी से लेकर प्रयागराज तक यमुना में अवैध खनन आखिर किसकी शह और सरंक्षण में चल रहा है? दिन के उजाले में गरजती मशीनें, सैकड़ों नावों की कतारें और सैकड़ों ट्रैक्टर-डंपरों की आवाजाही किसी छुपे अपराध की नहीं है।

क्या सफेदपोश का संरक्षण और सिस्टम का गठजोड़?

बेखौफ खनन और नाममात्र की कार्रवाई सफेदपोश के संरक्षण और सिस्टम का गठजोड़ बता रही है। दोनों जिलों में 400 से ज्यादा ठिकानों पर बालू का अवैध भंडारण, खेतों-बागों और सड़कों पर कब्जा… यह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि प्रशासन की नाकामी का प्रमाण भी है। पूरा खेल दो जिलों की सीमाओं के बीच इस तरह रचा गया है कि जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टाल दी जाए।

sand dump in Prayagraj

कई सवाल भी उठ रहे 

न पुलिस की सख्ती दिखती है, न खनन विभाग की कार्रवाई। सफेदपोश चेहरे, पासरगैंग और माफिया की तिकड़ी ने ऐसा जाल बुना है कि शिकायतें भी दम तोड़ देती हैं। यह अब सिर्फ अवैध खनन नहीं, बल्कि व्यवस्था के मूक समर्थन का उदाहरण बन चुका है। सवाल है कि क्या प्रशासन को सच दिखाई नहीं देता या फिर आंखें बंद करने की कीमत तय हो चुकी है? दोनों जिलों के बीच मझियारी और सैदपुर में पट्टा न होने के बाद भी धारा के बीच शनिवार को भी मशीनों से खनन होता पाया गया।

sand mining sand in Prayagraj

इन आंकड़ों पर ध्यान दें

- 400 से ज्यादा स्थानों पर प्रयागराज से लेकर कौशांबी तक किया जा रहा बालू का अवैध भंडारण
- 1500 ट्रैक्टर ट्राली, 1200 से ज्यादा ट्रक और डंपर लगे हैं अवैध परिवहन में
- 1500 नावों से यमुना की धारा के बीच हो रहा खनन, टोंस व बेलन में लगाई पनचक्की

यमुना में बालू खनन प्रयागराज में, परिवहन कौशांबी से

माफिया भी खनन विभाग को खूब चकमा दे रहे हैं। यमुना में बालू का अवैध खनन तो प्रयागराज जनपद की ओर करा रहे हैं और बालू का अवैध परिवहन कौशांबी जिले की तरफ से करा रहे हैं। अवैध खनन प्रयागराज के लालापुर थाना क्षेत्र के मझियारी और भिलोर गांव के सामने यमुना में हो रहा है। खनन तो मझियारी की ओर कराया जा रहा है जबकि नावों से उसे कौशांबी के सैदपुर घाट पर ले जाकर वहां से ट्रकों व डंपरों से आगे भेजा जाता है। यहां पर लगभग 70-80 नावों से बालू का अवैध खनन कराया जा रहा है। वहीं 40-45 ट्रकों को बालू के परिवहन के लिए लगाया गया है।

sand dumping in Prayagraj

खनन माफिया की सेटिंग 

मझियारी और भिलोर में पट्टा नहीं है। चायल नशीरपुर और शेरगढ़ में नावों से धारा के बीच नाव से खनन कर लालापुर की ओर ले जाकर परिवहन करते हैं। यमुना से बालू का सिर्फ अवैध खनन ही माफिया नहीं करा रहे हैं, बल्कि अवैध रूप से भंडारण और परिवहन भी करा रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारियों को वह दिखाई नहीं दे रहा है। खनन माफिया की सेटिंग ही इसकी वजह बताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्थानों पर तो माफिया ने सड़क के किनारे बालू का भंडारण करा दिया है।

इन इलाकों में बालू का अवैध भंडारण 

नैनी के बसवार, महेवा, मड़ौका, मोहब्बतगंज, बिरवल, सुजावन महादेव, बारा के लालापुर, प्रतापपुर, कंजासा, भिलोर तथा शहर के कीडगंज, करेली, करैलाबाग, सिविल लाइंस, सलोरी, दारागंज, झलवा, जार्जटाउन, धूमनगंज, नीवां, राजापुर के साथ झूंसी व फाफामऊ क्षेत्रों में भंडारण है। करछना के लवायन, रवनिका, डीहा, सेमरहा, गड़ैला, फूलपुर के छतनाग, हनुमानगंज, हबुसा मोड़, अंदावा, ककरा, कोटवा, लीलापुर, धनैचा, हंडिया के दुमदुमा, लाक्षागृह, मेजा के छतवा, बिसेन का पूरा, मांडा, अमिलहवा चौराहे के पास बालू का अवैध भंडारण है।

बालू के अवैध परिवहन कर रहे सैकड़ों वाहन 

यही नहीं खनन माफिया बालू व गिट्टी का अवैध रूप से परिवहन भी कराते हैं। प्रयागराज शहर और कौशांबी में लगभग 400 स्थानों पर बड़े पैमाने पर अवैध रूप से बालू का भंडारण हुआ है, जिसके अवैध परिवहन में 1500 ट्रैक्टर-ट्राली तथा 1200 से ज्यादा ट्रक व डंपर भी लगे हैं। भोर से यमुना में बालू के अवैध खनन में 1500 नावों पर 8000 के करीब श्रमिकों को उतार दिया जाता है, जो दिन भर बालू निकालते हैं।

कौशांबी में बेधड़क खनन, घाटों के पास भंडारण

बालू खनन तो कौशांबी में करीब डेढ़ दर्जन से अधिक घाटों पर कराए जा रहे हैं। मल्हीपुर, केवट का पुरवा (नंदा का पुरवा), ऐगवां (महिला), महेवाघाट, दलेलागंज, पभोसा, कटैया और भवनसुरी घाटों पर खनन का पट्टा खनन विभाग द्वारा दिया गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उमरवल, छेकवा, गोपसहसा, हिसामबाद, पाली उपरहार समेत पट्टा खनन वाले कई घाटों पर भी अवैध खनन पोकलैंड, बैकहो लोडर (जेसीबी) से दिन-रात यमुना की बीच धारा में कराया जाता है।

अस्थायी पुल बनाकर अवैध खनन 

यही नहीं कुछेक स्थानों पर तो यमुना की धारा में ही मिट्टी, गिट्टी आदि से अस्थायी पुल बनाकर खनन कराया जाता है। बीच धारा से घाटों तक बालू परिवहन के लिए सैकड़ों की संख्या में बड़ी-बड़ी नावें भी लगी रहती हैं।घाटों पर बालू को डंप किए जाने के बाद डंपरों, ट्रकों अथवा ट्रैक्टरों के जरिए घाटों के आसपास भंडारण के अलावा परिवहन कराया जाता है।

अधिकारी बोले- कड़ी कार्रवाई हो रही 

खनन विभाग द्वारा 16-17 स्थानों पर बालू के भंडारण के लिए लाइसेंस दिए जाने के दावे हैं, लेकिन इस धंधे से जुड़े जानकारों का मानना है कि भंडारण कम से कम 50 से 60 स्थानों पर किया जाता है। अधिकारी कहते हैं, बालू के अवैध परिवहन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराई जा रही है। पिछले तीन दिनों में काफी संख्या में ट्रकों व डंपरों का चालान कराया गया है।

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