मार्च में आसमान में मचेगी हलचल: नार्मिड उल्का वर्षा, आंशिक चंद्र ग्रहण और वसंत विषुव का दिखेगा अद्भुत नजारा
मार्च में कई खगोलीय घटनाएं होंगी, जिनमें नार्मिड उल्का वर्षा, आंशिक चंद्रग्रहण और वसंत विषुव प्रमुख हैं। नार्मिड उल्का वर्षा ...और पढ़ें

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अमलेन्दु त्रिपाठी, जागरण प्रयागराज। मार्च में कई खगोलीय घटनाएं होने जा रही हैं। इनमें नार्मिड उल्का वर्षा, आंशिक चंद्रग्रहण और वसंत विषुव प्रमुख है। नार्मिड उल्का वर्षा 14 मार्च के आस-पास चरम पर होगी। इसकी शुरुआत मार्च के प्रथम सप्ताह से हो रही है।
नार्मिड तारामंडल में प्रकाश बिंदु क्षितिज के ऊपर होता है, तब उल्काओं को देखने का अवसर मिलता है। नार्मिड (गामा नार्मिड) को सूर्योदय से पहले अर्थात करीब दो बजे से साढ़े तीन बजे के बीच अच्छी तरह से देखा जा सकता है। अंधेरे आकाश में करीब छह उल्कापिंड प्रति घंटा की दर से बारिश हो सकती है। अच्छे तरीके से देखने के लिए शहर के प्रकाश से दूर जाना होगा।

कभी-कभी चंद्रमा की रोशनी भी इसे देखने में बाधा डाल सकती है। जवाहर तारा मंडल की विज्ञानी सुरूर फातिमा कहती हैं कि दक्षिण दिशा में देखें तो आकाश में नोर्मा तारामंडल नजर आता है। यहीं से गामा नार्मिड उल्का वर्षा होती है। नामकरण का आधार ये तारामंडल हैं। यह उल्का वर्षा तब होती है जब पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर लग रही होती है और किसी धूमकेतु या क्षुद्रग्रह से छोड़े गए मलबे से होकर गुजरती है।
धूल के कणों से लेकर छोटे कंकड़ तक के आकार के टुकड़ों से बना यह मलबा सौर मंडल में अपने मूल पिंड के मार्ग के साथ फैल जाता है। ये टुकड़े पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 125,000 मील प्रति घंटे (201,000 किलोमीटर प्रति घंटे) की गति से प्रवेश करते हैं। ये एफ-16 जेट विमान की गति से 85 गुना अधिक है।

अधिक रफ्तार के कारण मलवा जल उठता है और प्रकाश की चमकदार लकीरें नजर आती हैं। बड़े टुकड़े कभी कभी चमकदार आग के गोले से नजर आते हैं। एक और महत्वपूर्ण खगोलीय घटना तीन मार्च को आंशिक चंद्र ग्रहण के रूप में होने जा रही है। चंद्रमा पृथ्वी की छाया से गुजरेगा।
भारत सहित एशिया के अधिकांश हिस्सों में इसे देख सकते हैं। आंशिक चंद्र ग्रहण के समय पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा पूरी तरह से एक सीध में नहीं होते। यही वजह है कि चंद्रमा का केवल एक हिस्सा अम्ब्रा में जाता है अर्थात पृथ्वी की अंधेरी छाया में चला जाता है। आंशिक चंद्र ग्रहण (पार्शियल लूनर एक्लिप्स) तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच से गुजरती है।
21 मार्च को बराबर होगा दिन और रात
खगोलीय घटनाओं की बात करें तो बसंत विषुव 21 मार्च को होने जा रहा है। दिन और रात बराबर होगा। ऐसी ही स्थिति 23 सितंबर को भी होगी। विषुव साल में दो बार होता है। इस समय सूर्य सीधे भूमध्य रेखा के ऊपर होता है। वसंत विषुव उत्तरी गोलार्द्ध में 20 या 21 मार्च को होता है।
दक्षिणी गोलार्द्ध में यह 22 या 23 सितंबर को होता है। इस समय सूर्य विषुवत वृत्त के ऊपर होता है और दोनों गोलार्द्धों को लगभग समान रूप से प्रकाशित करता है। वसंत विषुव के बाद उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य के करीब हो जाता है। परिणामस्वरूप सूर्योदय जल्दी व सूर्यास्त देर में होता है। यही कारण है कि दिन बड़े होने लगते हैं और रात छोटी।
