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देशभर के रेलवे स्टेशनों से मिटेंगे गुलामी के निशान, दिखेगा नया भारत; रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को दिया सख्त निर्देश

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 10 May 2026 07:05 AM (GMT+05:30)

रेलवे बोर्ड ने 14 मई तक सभी जोन को ब्रिटिश काल के प्रतीकों और प्रथाओं को हटाने का सख्त निर्देश ...और पढ़ें

उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज स्थित कोरल क्लब में लगा ईस्ट इंडिया कंपनी शासन का निशान। जागरण

उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज स्थित कोरल क्लब में लगा ईस्ट इंडिया कंपनी शासन का निशान। जागरण

HighLights

  1. 14 मई तक सभी रेलवे जोन को हटाने होंगे सभी निशान

  2. प्रयागराज के कोरल क्लब से भी हटेगा धातु का लोग

अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। रेलवे बोर्ड ने देशभर के सभी जोन को सख्त निर्देश दिए हैं कि 14 मई तक ब्रिटिश काल के उन तमाम प्रतीकों, प्रथाओं और अवशेषों को हटा दिया जाए, जो आज भी दासता की याद दिलाते हैं। इस अभियान के तहत दिल्ली-हावड़ा रूट पर तत्कालीन ब्रिटिसर्स के लिए बना प्रयागराज का ऐतिहासिक 'कोरल क्लब', जो कभी ब्रिटिश रसूख का केंद्र था, वहां से भी ईस्ट इंडियन रेलवे का मेटल लोगो उखाड़ कर हटाया जाएगा।

भारतीय रेलवे के लोगो वाली स्वदेशी टाई अधिकारी पहनेंगे

वर्षाें से अनिवार्य रहे 'बंद गला' कोट की जगह अब आधुनिक बिजनेस सूट या भारतीय जलवायु के अनुकूल सफेद शर्ट-पैंट और भारतीय रेलवे के लोगो वाली स्वदेशी टाई अधिकारी पहनेंगे। गर्मी को ध्यान में रखते हुए खादी और सूती परिधानों को प्राथमिकता दी जा रही है। वर्दी पर लगे पुराने पीतल के बटनों को हटाकर अब उच्च गुणवत्ता वाले फाइबर या स्टील के बटन लगाए जाएंगे, जिन पर गर्व से अशोक चक्र अंकित होगा।

रेलवे के 'सैलून कोच' अत्याधुनिक तकनीक से होंगे लैस  

रेलवे के 'सैलून कोच' जो कभी 'चलते-फिरते महलों' के रूप में जाने जाते थे, अब अत्याधुनिक तकनीक से लैस होंगे। इनमें चांदी और चीनी मिट्टी के बर्तनों के स्थान पर स्टेनलेस स्टील और बायो-डिग्रेडेबल कटलरी का उपयोग होगा। साथ ही, इन कोचों में सेंसर और डेटा रिकॉर्डिंग मशीनें लगाकर इन्हें सुरक्षा और दक्षता का मानक बनाया जा रहा है। पत्राचार में इस्तेमाल होने वाले 'योर ओबेडिएंट सर्वेंट' जैसे शब्दों को हटाकर अब 'भवदीय' जैसे गरिमापूर्ण शब्दों का प्रयोग शुरू हो गया है।

ब्रिटिशकाल के ''गार्ड' अब ट्रेन मैनेजर

ब्रिटिशकाल के ''गार्ड' अब ट्रेन मैनेजर हैं और 'खलासी' को सहायक के रूप में नई पहचान मिली है। पटरियों के किनारे लगे मील के पत्थरों को 'किलोमीटर पोस्ट' और पुरानी पीतल की घंटियों को डिजिटल सूचना तंत्र में बदल दिया गया है। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि रेलवे अब ब्रिटिश विरासत के बोझ से मुक्त होकर 'विकसित भारत'' के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।