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स्टेशनों की लूप लाइनों पर 60 की गति से दौड़ेंगी ट्रेनें, बिना गिट्टी वाले स्वदेशी ट्रैक बिछाएगा रेलवे

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 05 Jun 2026 06:37 PM (IST)Updated: Fri, 05 Jun 2026 09:08 PM (IST)

भारतीय रेलवे स्टेशनों की लूप लाइनों और प्लेटफार्म पटरियों पर स्वदेशी बैलास्ट-लेस ट्रैक बिछाएगा, जिससे ट्रेनों की गति 15 किमी ...और पढ़ें

रेलवे नए ट्रैक बिछाकर स्टेशनों की लूप लाइन पर ट्रेनों की गति बढ़ाएगा।

रेलवे नए ट्रैक बिछाकर स्टेशनों की लूप लाइन पर ट्रेनों की गति बढ़ाएगा।

HighLights

  1. स्टेशन की लूप लाइन व प्लेटफार्म की पटरी हाईटेक स्वदेशी बैलास्ट-लेस ट्रैक होंगे

  2. अभी तक 15 किमी प्रतिघंटा की गति से ही लूप लाइन में चलती थी ट्रेन

  3. रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को जारी किया निर्देश, लगाएं स्वादेशी ट्रैक

अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। अक्सर रेलवे स्टेशन के पास आते ही ट्रेन की गति बहुत धीमी हो जाती थी और प्लेटफार्म से पहले आउटर या लूप लाइन पर रेंगने लगती हैं। यह समस्या अब खत्म होगी।  स्टेशनों की लूप लाइनों और प्लेटफार्म वाली पटरियों को हाईटेक स्वदेशी बैलास्ट-लेस ट्रैक (बिना गिट्टी वाले ट्रैक) में बदला जाएगा। इससे प्लेटफार्म और लूप लाइनों पर ट्रेनों की रफ्तार सीधे 60 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी।

स्टेशनों के निकट ट्रेन की 15 किमी हो जाती है स्पीड 

वर्तमान में स्टेशनों के पास गिट्टी वाले पुराने ट्रैकों की वजह से ट्रेनों को महज 15 किलोमीटर प्रति घंटे की कछुआ गति से प्लेटफर्म पर लाया जाता है। इस गति प्रतिबंध के कारण पीछे आ रही अन्य एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें भी आउटर पर खड़ी हो जाती हैं, जिससे यात्रियों का समय बर्बाद होता है।

बीएलटी-आएफएस (सीटी-52) तकनीक की विशेषता 

रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक ट्रैक अनुराग कुमार ने 15 मई को इसके लिए आदेश जारी कर दिया है। नए निर्देश के अनुसार, अब रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई स्वदेशी तकनीक 'बीएलटी-आएफएस (सीटी-52)' का इस्तेमाल किया जाएगा। यह बिना गिट्टी वाला कंक्रीट ट्रैक होगा, जो भारी-भरकम 25 टन एक्सल लोड वाली ट्रेनों को भी आसानी से संभाल सकेगा।

आउटर पर नहीं खड़ी होंगी ट्रेन 

इससे स्टेशन के पास ट्रेन आउटर पर अब नहीं खड़ी होंगी। प्लेटफार्म की पटरियों के बीच में कंक्रीट ब्लाक होने से वहां साफ-सफाई आसान होगी। पटरियों के धंसने या टूटने का खतरा न्यूनतम होगा। इस नए ट्रैक सिस्टम को बनाने वाली कंपनियों को पांच साल की परफार्मेंस वारंटी देनी होगी और पहले तीन प्रोजेक्ट की निगरानी आरडीएसओ करेगा।

यात्रा अधिक आरामदायक व समय पर पूरी होगी 

सब कुछ सही रहा तो इस नए सिस्टम के पूरे देश में लागू किया जाएगा। सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि इससे ट्रेनों की गति बढ़ेगी, यात्रा अधिक सुरक्षित, आरामदायक और समय पर पूरी होगी।

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