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IIIT Allahabad का दीक्षा समारोह: 22 मेधावियों को मेडल और 728 को मिलीं उपाधियां, दिव्यांश ओमर को अध्यक्ष स्वर्ण पदक

By Mritunjay Mishra Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 12 Sep 2026 04:08 PM (GMT+05:30)

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) प्रयागराज के 21वें दीक्षांत समारोह में 728 विद्यार्थियों को उपाधियां और 22 मेधावियों को पदक प्रदान किए गए।

आईआईआईटी इलाहाबाद के 21वें दीक्षा समारोह को संबोधित करते मुख्य अतिथि आईआईएसईआर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन प्रो. अरविंद ए. नातू। जागरण

आईआईआईटी इलाहाबाद के 21वें दीक्षा समारोह को संबोधित करते मुख्य अतिथि आईआईएसईआर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन प्रो. अरविंद ए. नातू। जागरण

HighLights

  1. मुख्य अतिथि ने कहा- तकनीक के साथ मानवीय सरोकारों को न भूलें

  2. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान इलाहाबाद 21वें दीक्षा समारोह

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) का 21वां दीक्षां समारोह शनिवार को आयोजित हुआ। समारोह में शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 22 मेधावियों को विभिन्न पदकों से सम्मानित किया गया। वहीं कुल 728 विद्यार्थियों को स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध सहित विभिन्न उपाधियां प्रदान की गईं। वर्ष 2026 में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए दिव्यांश ओमर को अध्यक्ष स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान (आईआईएसईआर) संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. अरविंद पी. नातू ने कहा कि विज्ञान और तकनीक ने पिछले कुछ दशकों में समाज और मानव जीवन को जिस तरह बदला है, वह अभूतपूर्व है। उनकी पीढ़ी ने ऐसा समय देखा है, जब रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के लिए लंबी कतारें लगती थीं और रेफ्रिजरेटर, स्कूटर तथा टेलीफोन जैसी सुविधाएं भी विलासिता मानी जाती थीं। कंप्यूटर, इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक संचार तो उस समय की कल्पना से भी बाहर थे।

उन्होंने कहा कि आज जीवन में उपलब्ध सुविधाएं विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास तथा उसके सामाजिक उपयोग का परिणाम हैं। विज्ञान एवं तकनीक ने न केवल जीवन को सुविधाजनक बनाया है बल्कि समाज की कार्यप्रणाली और लोगों के जीवन जीने के तरीके को भी पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे में नई पीढ़ी के इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के कंधों पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का झंडा आगे ले जाने की बड़ी जिम्मेदारी है।

प्रो. नातू ने कहा कि समय के साथ समाज की जरूरतें और चुनौतियां भी बदलती रहती हैं। पहले कमी और संसाधनों के लिए कतारें बड़ी चुनौती थीं, जबकि आज अत्यधिक उपभोग, गति और तकनीकी बदलाव नई चुनौतियां लेकर आए हैं। उन्होंने ऊर्जा के क्षेत्र में सौर ऊर्जा की दक्षता बढ़ाने, हाइड्रोजन ईंधन एवं उसके भंडारण तथा बैटरियों के लिए नए पदार्थ विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के बड़े हिस्से में आज भी लोगों को आसानी से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है। सस्ती दवाओं, टीकों और जैव-आधारित या इंजीनियर्ड पदार्थों की जरूरत बनी हुई है। स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के निचले स्तर तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती है। इन समस्याओं की सूची लंबी है और इनके समाधान में विज्ञान एवं तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

एआइ से समाधान पर मानवीय संवेदनाएं भी जरूरी

मुख्य अतिथि ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), डीप लर्निंग, मशीन लर्निंग और इंटरनेट आफ थिंग्स (आइओटी) जैसे आधुनिक उपकरणों का सही इस्तेमाल इन चुनौतियों से निपटने में मदद कर सकता है। क्वांटम कंप्यूटिंग भी विशेष रूप से जलवायु विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास की गति को तेज कर सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि संस्थान में उन्हें इन आधुनिक तकनीकों और उनके अनुप्रयोगों का प्रशिक्षण मिला है।

बोले कि स्नातक अध्ययन के दौरान उनकी रचनात्मकता को भी इन तकनीकों के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसलिए वे भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दीक्षांत समारोह से निकलने वाले विद्यार्थी आत्मनिर्भर भारत की तेज होती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। हालांकि, उन्होंने तकनीकी विकास के साथ उसके मानवीय पक्ष को नजरअंदाज नहीं करने की चेतावनी भी दी।

उन्होंने कहा कि एआइ आज एक ओर जीवन की गति और कार्यक्षमता बढ़ाने की संभावना रखता है, वहीं दूसरी ओर रोजगार में कमी और मानवीय रचनात्मकता के प्रभावित होने जैसी आशंकाएं भी सामने हैं। तकनीक को अच्छे और बुरे के बीच अंतर समझने तथा उसके प्रभावों को ध्यान में रखते हुए विकसित और इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि तकनीकी उपलब्धियों की दौड़ में भावनात्मक लचीलापन, परिवार, सामाजिक संबंध और मानवीय संवेदनाओं को पीछे नहीं छोड़ना चाहिए। तकनीक तभी सार्थक है, जब वह मानव जीवन को बेहतर बनाए और समाज को अधिक संवेदनशील तथा सक्षम बनाए।

इन विद्यार्थियों को मिले प्रमुख पदक

समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए। बीटेक (आइटी) में दिव्यांश ओमर को स्वर्ण, शाह आर्यन को रजत और इंदुरी नागा आदित्य रेड्डी को कांस्य पदक मिला। बीटेक (ईसीई) में कासु साईं उषाश्री ने स्वर्ण, विधि अग्रवाल ने रजत और ध्रुव अग्रवाल ने कांस्य पदक प्राप्त किया। एमबीए में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने पर यश पंत को स्वर्ण, प्रशांत को रजत और मेधा केरशवानी को कांस्य पदक प्रदान किया गया। वहीं एमटेक (ईसीई) में मोहम्मद कैफुद्दीन खान को स्वर्ण, दीपक जोशी को रजत और सुषमा को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया। इसके अलावा समारोह में विभिन्न एंडोमेंट पदक भी प्रदान किए गए। इनमें मनसा महेंद्रू, सृष्टि चक्रवर्ती, दिव्यांश ओमर, कासु साईं उषाश्री, शाह आर्यन और स्वरूप डोरा को सम्मानित किया गया।

466 स्नातक और 210 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधि

दीक्षांत समारोह में 466 स्नातक विद्यार्थियों, 210 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अलावा एमटेक-पीएचडी की 13 दोहरी उपाधियां, एमबीए-पीएचडी की एक उपाधि, कार्यरत पेशेवरों के लिए पीएचडी कार्यक्रम के सात विद्यार्थियों तथा 31 शोधार्थियों को भी उपाधि प्रदान की गई। समारोह में विज्ञानश्री पुरस्कार से सम्मानित प्रो. भीम सिंह तथा डिस्सेक्ट एआइ के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अपूर्व कुमार भी शामिल हुए। संस्थान के डीन-एलुमनी अनुपम अग्रवाल, डीन एकेडमिक्स प्रो. पवन चक्रवर्ती, कुलसचिव प्रो. मंदार सुभाष कार्यकर्ते, जनसंपर्क अधिकारी पंकज मिश्र समेत संस्थान के अन्य अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और उनके अभिभावक मौजूद रहे।