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खजूर की खेती से किसानों का भरेगा खजाना, प्रति एकड़ लाखों रुपये का मुनाफा; संगम नगरी में बागवानी की बड़ी योजना

By Gyanendra Singh Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 30 Jul 2026 03:48 PM (IST)

प्रयागराज में खजूर की खेती से किसानों को प्रति एकड़ लाखों का मुनाफा होगा, जिसके लिए उद्यान विभाग ने कच्छ ...और पढ़ें

प्रयागराज में खजूर की खेती सेकिसानों की तकदीर बदलने की तैयारी है।

प्रयागराज में खजूर की खेती सेकिसानों की तकदीर बदलने की तैयारी है।

HighLights

  1. यमुनापार के पाठा में प्राथमिक तौर पर इस वर्ष से शुरू कराई जाएगी खजूर की खेती

  2. उद्यान विभाग के अफसर गुजरात प्रांत के कच्छ में प्रशिक्षण लेकर आए, अब तैयारी

जागरण संवददाता, प्रयागराज। खून की कमी दूर करने के साथ हर पाचन सुधारने वाले खजूर की खेती संगम नगरी में भी होगी। प्राकृतिक पोषक तत्वों से भरपूर इस छोटे से फल की बागवानी के लिए जनपद में बड़ी योजना चलाने की तैयारी है। इसके लिए उद्यान विभाग के अफसर गुजरात के कच्छ में प्रशिक्षण लेकर आ गए हैं, जो अब यमुनापार के पाठा में इसकी बागवानी के लिए जोर-शोर से जुट गए हैं। इस वर्ष इसकी शुरुआत ही कराई जाएगी, जबकि अगले सीजन से गांव-गांव में इसके पौधे लगवाए जाएंगे।

खजूर के लाभ 

खजूर खाने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है। इसमें प्राकृतिक शुगर (ग्लूकोज और फ्रुक्टोज) होने से थकान मिटती है और ताकत मिलती है। इसका फाइबर पेट साफ करता है और कब्ज से बचाता है। इसमें कापर, मैग्नीशियम और सेलेनियम जैसे खनिज होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।आयरन की मौजूदगी से हीमोग्लोबिन का स्तर सुधरता है। पोटेशियम और मैग्नीशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखते हैं, जिससे दिल की सेहत बेहतर होती है।

सरकार का खजूर की बागवानी पर जोर

इसके दृष्टिगत ही सरकार ने पठारी क्षेत्रों में खजूर के फल की बागवानी पर जोर दिया है, जिसके तहत पिछले दिनों उद्यान विभाग के अधिकारियों को गुजरात में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था। प्रयागराज का यमुनापार का लगभग 50 प्रतिशत पठारी इलाका है, जहां इसकी बागवानी प्रबल संभावन है।

खजूर की खेती के लिए पाठा क्षेत्र ही क्यों? 

पाठा क्षेत्र शुष्क व गर्म जलवायु है और यहां की मिट्टी बलुई दोमट है, जो खजूर की खेती के लिए उत्तम है। रोपाई के तीन से चार वर्षों बाद इसके पौधे फल देने लगते हैं। एक पौधे से सालाना 100 से 1500 किलो तक फल मिल जाते हैं, जिससे किसान प्रति एकड़ लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं। शंकरगढ़, बारा, नारीबारी, लालापुर, प्रतापपुर, कोरांव, कोहड़ार व मेजा क्षेत्र में इसकी बागवानी कराई जाएगी।

गुजरात से खजूर के पौधे लाए जाएंगे, जो टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार होंगे। अगस्त और सितंबर माह में इसके पौधे रोपे जाएंगे। बारा, मेजा व कोरांव क्षेत्र के किसानों की सूची तैयार हो रही है, जिन्हें इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
- मेवाराम, जिला उद्यान अधिकारी।

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