बेटे के निकाह में शामिल हो सकेगा उम्रकैद की सजा काट रहा कैदी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ दी इजाजत
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुजफ्फरनगर हत्याकांड के दोषी अरशद की उम्रकैद की सजा निलंबित करने से इनकार कर दिया है।

HighLights
अरशद की उम्रकैद की सजा निलंबित करने से इनकार।
बेटे के निकाह में पुलिस हिरासत में जाने की अनुमति।
आने-जाने का पूरा खर्च स्वयं उठाने का निर्देश।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुजफ्फरनगर के चर्चित हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे अरशद की सजा निलंबित करने की अर्जी खारिज कर दी है। हालांकि, अदालत ने उसे 20 अक्टूबर को बेटे के निकाह में शामिल होने की अनुमति दी है। इसके लिए उसे पुलिस हिरासत में ले जाया जाएगा और रस्में पूरी होते ही वापस जेल पहुंचा दिया जाएगा।
अदालत ने आने-जाने का पूरा खर्च भी अरशद को स्वयं उठाने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति मनोज बजाज और न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ ने अरशद की आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। अरशद के अधिवक्ता ने निकाह का कार्ड प्रस्तुत करते हुए बताया कि उसके बेटे का निकाह 20 अक्टूबर को होना है।
पिता होने के नाते उसे निकाह की रस्में निभानी हैं। इस आधार पर उम्रकैद की सजा दो सप्ताह के लिए निलंबित करने की मांग की गई थी। अपर शासकीय अधिवक्ता और भोपा थाना प्रभारी ने भी निकाह की तारीख की पुष्टि की। 26 मई 2010 को शमीम ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
किस मामले में हुई उम्रकैद?
आरोप था कि उसी दिन उसके भाई नसीम और जुबैर एक मुकदमे की सुनवाई के लिए अदालत जा रहे थे। रास्ते में अरशद अपने साथियों के साथ मोटरसाइकिलों से पहुंचा और देशी तमंचों से फायरिंग की। इसमें नसीम की मौत हो गई।
अरशद पर नसीम को नजदीक से गोली मारने का आरोप था। मुजफ्फरनगर के अपर सत्र न्यायाधीश ने 29 अगस्त 2019 को अरशद को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता के परिवार ने आरोपितों के हाथों अपने दो सदस्यों को खोया है। ऐसे में सजा निलंबित करने का आधार स्वीकार नहीं किया जा सकता। मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
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