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यूपी की जिला अदालतों की सुस्ती पर इलाहाबाद HC चिंतित, कहा- 16 साल में 178 तारीखें... ये शुभ संकेत नहीं

Published: Thu, 01 Oct 2026 10:10 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिला अदालतों में मुकदमों की धीमी रफ्तार और आदेशों की जानकारी न मिलने पर गंभीर चिंता जताई है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट। (तस्वीर- फाइल)

इलाहाबाद हाई कोर्ट। (तस्वीर- फाइल)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने जिला अदालतों में मुकदमों की धीमी रफ्तार पर गंभीर चिंता जताई।

  2. 20-40 साल तक मुकदमों का चलना संस्थागत लापरवाही का परिणाम बताया।

  3. प्रयागराज एसीजेएम को उर्मिला, सरफराज मामलों के त्वरित निपटारे के निर्देश।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। जिला अदालतों में मुकदमों की धीमी रफ्तार और अपने आदेशों के क्रम में जानकारी नहीं सुलभ कराने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कहा कि यह देरी किसी एक व्यक्ति की लापरवाही नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवहार का नतीजा है। 20 साल तक आरोप तय न होना और 40 साल तक मुकदमों का चलना संस्था के लिए शुभ संकेत नहीं है।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने चार अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई पूरी करने के बाद यह टिप्पणी की है। चार मामलों से कोर्ट के समक्ष विलंब की बात सामने आई।

नैनी थाना प्रयागराज से संबंधित उर्मिला मिश्र का 2009 का आपराधिक मामला 16 साल में 178 से ज्यादा बार लिस्ट हुआ, लेकिन अभी तक आरोप तय नहीं हुआ। 2008 के सरफराज अहमद केस में 2010 में चार्जशीट दाखिल हुई। करीब 143 तारीखें पड़ीं, फिर भी ट्रायल आगे नहीं बढ़ा।

कानपुर का वीएस पालीट्यूब चेक बाउंस केस महज 59 हजार रुपये का है और मामला 2013 से लंबित है। 100 से अधिक बार पेशी हुई, आरोपित नियमित पेश नहीं होता। पप्पू उर्फ मेट केस में जमानत के लिए दो जमानतदार मांगे गए थे। हाई कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को पांच हजार रुपये के निजी मुचलके और एक जमानतदार पर रिहाई का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने बच्ची देवी मामले में जमानत की प्रक्रिया तय की थी।

कोर्ट के अनुसार 12 अगस्त 2025 के बाद 9775 अग्रिम जमानत और 1,56,155 नियमित जमानत आदेशों में दो जमानतदार मांगे गए।कोर्ट ने कहा कि सबसे ज्यादा ऐसे आदेश गाजियाबाद, लखनऊ, सीतापुर, बुलंदशहर और सहारनपुर जिलों से मिले। जिलों से रिपोर्ट मांगी, लेकिन केवल 25 ने जवाब दिया और वह भी ज्यादातर अधूरा था। कोर्ट ने आगरा के जिला जज की रिपोर्ट की सराहना की।

मीरजापुर में 1981 के चार मामले लंबित मिले हैं। प्रयागराज के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को कोर्ट ने निर्देश दिया कि उर्मिला मिश्रा और सरफराज अहमद के मुकदमों को समयबद्ध तरीके से निपटाएं। बार-बार छूट की अर्जी दाखिल होने पर उसे खारिज किया जाए।

समन और वारंट तामील में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो। पालीट्यूब मामले में आरोपित की हर तारीख पर हाजिरी सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कहा कि वह न आए तो कानपुर नगर के पुलिस आयुक्त उसकी उपस्थिति सुनिश्चित कराएं और फिर भी पेश न हो तो हिरासत में लेकर ट्रायल पूरा कराया जाए।

कोर्ट ने मुख्य न्यायमूर्ति से फुल कोर्ट बुलाने तथा हाईकोर्ट रूल्स, 1952 के कड़ाई से पालन पर संवाद शुरू करने पर विचार का अनुरोध किया है। कहा कि फैसले की प्रति केंद्रीय विधि मंत्रालय के न्याय विभाग को भेजी जाए। रजिस्ट्रार जनरल पूरे रिकार्ड का डिजिटलीकरण सुनिश्चित करें।

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