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लव मैरिज करने वाले जोड़े को बड़ी राहत, इलाहाबाद HC ने कहा- बालिग को अपनी पसंद से शादी करने का हक

Published: Wed, 27 May 2026 05:30 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रेम विवाह करने वाले बालिग जोड़े को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने लड़की के पिता ...और पढ़ें

बालिग को अपनी पसंद से शादी करने का हक: हाई कोर्ट।

बालिग को अपनी पसंद से शादी करने का हक: हाई कोर्ट।

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विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रेम विवाह करने वाले बालिग जोड़े को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथा न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा है कि कानूनन बालिग लड़का-लड़की अपनी मर्जी से किसी से भी शादी कर पति-पत्नी की तरह साथ रह सकते हैं।

लड़की के पिता की शिकायत पर दर्ज एफआईआर रद करते हुए कोर्ट ने एसएसपी बदायूं को जोड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया है। मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि शिवानी और दीपक ने 11 अप्रैल 2026 को प्रयागराज स्थित आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली। शादी का सर्टिफिकेट भी कोर्ट में पेश किया। शिवानी के पिता रणवीर को रिश्ता मंजूर नहीं था।

उन्होंने 10 अप्रैल 2026 को थाना मूसा झाग में बीएनएस की धारा 137(2) और 87 के तहत एफआइआर दर्ज करा दी। शिवानी ने एसएसपी के समक्ष शिकायत कर कहा कि पिता और कुछ लोग उसे और उसके पति को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। दोनों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर प्राथमिकी रद करने के साथ ही सुरक्षा मांगी।

पांच मई को दंपती कोर्ट में पेश हुए। न्यायमूर्तियों ने शिवानी से खुद बात की। उसने अपनी उम्र 19 साल बताते हुए कहा कि उसने दीपक के साथ शादी की है और उसके साथ ही जाना चाहती है, पिता संग नहीं।

यह सुनने के बाद कोर्ट ने कहा -दोनों बालिग हैं। भारत के कानून के हिसाब से वे अपनी पसंद से शादी कर सकते हैं और पति-पत्नी की तरह रह सकते हैं। पिता अथवा पुलिस को दखल देने का कोई हक नहीं है।

कोर्ट ने माना कि पिता ने गलत नीयत से प्राथमिकी कराई। आदेश दिया है कि सीजेएम रोजनामचे (जनरल डायरी) में लाल स्याही से यह दर्ज कराएं कि केस खत्म हो गया है।

एसएसपी को भी इस बात की सख्त हिदायत दी है कि शिवानी और दीपक को पिता या उसके कहने पर किसी से भी जान-माल का खतरा न हो। अगर दोनों को कोई नुकसान हुआ तो वह खुद कोर्ट के सामने जवाबदेह होंगे।

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