'सहमति से बने संबंध के बाद शादी से इनकार पर दुष्कर्म का आरोप प्रक्रिया का दुरुपयोग'; इलाहाबाद HC का अहम फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद में लिव-इन रिलेशनशिप टूटने के बाद दर्ज दुष्कर्म मामले में आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

HighLights
गाजियाबाद दुष्कर्म मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी रोकी।
लिव-इन रिलेशनशिप टूटने के बाद दर्ज हुआ था यह मामला।
राज्य सरकार और शिकायतकर्ता से कोर्ट ने मांगा है जवाब।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद में लिव-इन रिलेशनशिप टूटने के बाद दर्ज दुष्कर्म के मामले में आरोपित की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने दिया। मामला गाजियाबाद के क्रासिंग रिपब्लिक थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। आरोपित की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे और उसने शादी का कोई वादा नहीं किया था।
याची का आरोप है कि संबंध टूटने के बाद शिकायतकर्ता ने उसे ब्लैकमेल करने और शादी के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया। याची की ओर से अधिवक्ता अभय प्रताप सिंह और मनीष कुमार ने पक्ष रखा।
हाई कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए आरोपित की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। मामले में शिकायतकर्ता का पक्ष भी सुना जाएगा। अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही आरोपों के संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी।
