चित्रकला प्रतियोगिता में इनाम की 51 हजार राशि का चेक एक्सपायर, HC ने सरकार को लगाई फटकार
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिला स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के 51 हजार रुपये के पुरस्कार चेक की वैधता समाप्त होने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

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विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिला स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता में 51 हजार रुपये पुरस्कार राशि देने में देरी और लापरवाही पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है।
चेक बनने के बाद भी विजेता को नहीं सौंपा गया और एक्सपायर हो गया। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) प्रयागराज को 20 जुलाई को नए चेक के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने और यह कारण बताने का आदेश दिया है कि उन पर वाद खर्च क्यों न लगाया जाए।
याची नैनी निवासी दीक्षा मिश्रा हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय पीजी कालेज में बीए अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। राज्य संस्कृति विभाग ने सेवा पखवाड़ा-2025 के तहत 17 सितंबर से दो अक्टूबर 2025 तक कार्यक्रम आयोजित किए थे। प्रयागराज में इसी क्रम में 29 सितंबर 2025 को हुई जिला स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता के वरिष्ठ वर्ग में दीक्षा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
विजेता के लिए 51 हजार नकद पुरस्कार घोषित था। छह अक्टूबर 2025 को पुरस्कार वितरण में दीक्षा को ट्राफी और प्रमाण पत्र तो मिला, लेकिन अधिकारियों ने फंड रिलीज नहीं हुआ कहकर राशि नहीं दी। दीक्षा और उनके छोटे भाई आदित्य ने कॉलेज, जिला प्रशासन और संस्कृति विभाग के कार्यालयों में इनाम राशि के लिए संपर्क किया।
संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह को रजिस्टर्ड पोस्ट, ईमेल और आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत भेजी। नोडल अधिकारी प्रो. श्यामजी सोनकर, डीआइओएस कार्यालय और जिला पर्यटन-संस्कृति परिषद से भी संपर्क किया गया, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
थक हार कर हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें राज्य सरकार, संस्कृति निदेशक, जिलाधिकारी, सीडीओ, डीआइओएस, जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद और प्रो. श्यामजी सोनकर को पक्ष बनाया गया।
डीआइओएस ने कोर्ट में 15 जुलाई को बताया कि पुरस्कार का चेक अप्रैल में तो बना दिया गया था, लेकिन वह 30 जून को वैधता समाप्त होने के कारण एक्सपायर हो गया। कोर्ट ने कहा, इससे स्पष्ट है कि प्राधिकारी ने याची को वैध चेक सौंपने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया, जबकि वह कानूनी रूप से इसकी हकदार है।
