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'भारत में साइबर क्राइम साइलेंट वायरस की तरह', इलाहाबाद HC की तल्ख टिप्पणी, नैनीताल बैंक हैकर की जमानत खारिज की

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 23 Aug 2026 04:25 PM (GMT+05:30)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साइबर अपराधों को 'साइलेंट वायरस' बताते हुए नैनीताल बैंक के सर्वर हैक कर 16 करोड़ रुपये हड़पने के आरोपी की दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. नैनीताल बैंक का सर्वर हैक कर 16 करोड़ हड़पने के आरोपित की दूसरी जमानत भी खारिज

  2. आरोपित के खिलाफ गौतमबुद्धनगर के साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज है, वह जेल में है

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि भारत में साइबर अपराध तेजी से बढ़े हैं। फिशिंग, रैनसमवेयर, डेटा ब्रीच जैसी घटनाएं आम हैं। साइबर क्राइम साइलेंट वायरस की तरह है, जो सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि समाज का भरोसा और सुरक्षा भी छीन रहा है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की एकलपीठ ने नैनीताल बैंक का सर्वर हैक कर 16 करोड़ रुपये हड़पने के आरोपित की दूसरी जमानत खारिज करते हुए की है। 

आरोपित के खिलाफ गौतमबुद्धनगर के साइबर क्राइम थाने में आइपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120बी, 201 और 66/66सी आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज है। वह 21 अप्रैल 2025 से जेल में है। याची के अधिवक्ता पवन गिरि ने कहा कि कोई नया आधार नहीं है। ट्रायल लंबित है और अभी तक चार्ज भी फ्रेम नहीं हुआ है। सह-आरोपित कुलदीप सिंह और शुभम बंसल को इसी कोर्ट ने अगस्त 2025 में जमानत दी है, इसलिए समता के आधार पर जमानत दी जाए।

राज्य की ओर से अपर सरकारी अधिवक्ता (एजीए) यज्ञवल्क पांडेय ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपित सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य है। वह सह-आरोपित मोहम्मद शाहवेज उर्फ शानू से म्यूल अकाउंट लेता था और उसे दो प्रतिशत कमीशन देता था। यह बात जांच में सह-आरोपित दानिश के बयान से सामने आई है। आरोपित एनआरआइ है, जमानत पर छूटा तो ट्रायल में उसकी मौजूदगी मिलना मुश्किल होगी।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने टिप्पणी की कि भारत में डिजिटल इंडिया के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले सागर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य 2025 का हवाला भी अदालत ने दिया जिसमें कहा गया है कि केवल समता के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। भूमिका, आरोपों की गंभीरता, सजा की प्रकृति और आपराधिक इतिहास भी देखना होगा।

पीठ का कहना था कि सरकारी बैंक के साथ किया गया यह फ्राड गंभीर है। समाज के लिए खराब उदाहरण है। सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी है। पहली जमानत 16 जनवरी 2026 को खारिज हो चुकी है और दूसरी अर्जी में कोई नया आधार नहीं है।