'बालिग महिला अपनी मर्जी की मालिक, जीवनसाथी चुनने के लिए परिवार की रजामंदी जरुरी नहीं; इलाहाबाद HC का फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि बालिग महिला को अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने का अधिकार है, जिसके लिए माता-पिता की रजामंदी जरूरी नहीं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने गाजियाबाद की एक महिला को अपनी पसंद के पति के साथ रहने की अनुमति दी
कोर्ट के निर्देश पर गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाना पुलिस ने महिला को अदालत में प्रस्तुत किया
विधि संवाददाता प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि बालिग को अपनी पसंद का जीवन साथी चुनने व साथ रहने का अधिकार है। इसी के साथ गाजियाबाद की एक महिला को अपनी पसंद के पति के साथ रहने की अनुमति दे दी है, भले ही उसके पिता को यह रिश्ता स्वीकार्य नहीं है। हाई कोर्ट ने 8 सितंबर 2026 के आदेश के तहत राज्य सरकार को सोनिका चौहान (26) को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने की पुलिस ने उसे अदालत में प्रस्तुत किया।
पिता पर धमकी का आरोप
हाई कोर्ट से बातचीत में सोनिका ने बताया कि उसने 28 अगस्त 2022 को अपनी मर्जी से, बिना किसी दबाव या डर के, अकबर खान से शादी की थी। उसने कहा कि वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है और अपने पिता की धमकियों तथा दबाव का सामना कर रही है। पति अकबर खान ने भी कोर्ट के सामने अपने वैवाहिक संबंध की पुष्टि की और पत्नी के साथ रहने की इच्छा जताई।
पिता ने बेटी को ब्लैकमेल करने का लगाया आरोप
वहीं, सोनिका के पिता लक्ष्मण सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी को ब्लैकमेल किया जा रहा है और वह दबाव में है। उन्होंने यह भी दावा किया कि चूंकि याचिकाकर्ता मुस्लिम है और उनकी बेटी हिंदू, इसलिए यह विवाह कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
बयान में दबाव, प्रलोभन या डर का संकेत नहीं मिला
न्यायमूर्ति संदीप जैन ने कहा कि सोनिका बालिग है और अपने फैसले के परिणामों को पूरी तरह समझती है। कोर्ट ने पाया कि उसके बयान में कहीं भी दबाव, प्रलोभन या डर का संकेत नहीं मिला। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि बालिग व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने का मौलिक अधिकार है और यह चुनाव माता-पिता या परिवार की इच्छा से बंधा नहीं हो सकता।
कोर्ट की वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप न करने की चेतावनी
अदालत ने सोनिका को अपनी पसंद की जगह पति के साथ रहने की स्वतंत्रता दी और पुलिस को दोनों की सुरक्षा तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही निजी प्रतिवादियों (परिवार) को दंपती के वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने की चेतावनी दी।
