'जानकारी के अभाव में कार्रवाई न करने वाला पुलिस अधिकारी लापरवाह नहीं', इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी पुलिस अधिकारी को सूचना के अभाव में कार्रवाई न करने पर लापरवाह ...और पढ़ें
-1790375545870_m.webp)
प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
पुलिस अधिकारी को सूचना के अभाव में लापरवाह नहीं माना जा सकता।
विस्फोटक मामले में पुलिस अधिकारी की सजा हाई कोर्ट ने रद्द की।
कोर्ट ने कहा, जानकारी न होने पर कार्रवाई न करना लापरवाही नहीं।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी पुलिस अधिकारी को केवल इस आधार पर लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता कि उसने कार्रवाई नहीं की, जब उसके पास कार्रवाई की आवश्यकता बताने वाली कोई सूचना या खुफिया जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस पुलिस अधिकारी की याचिका मंजूर करते हुए की, जिसे विस्फोटक जमा करने और उससे हुए घातक विस्फोट को रोकने में विफल रहने के आरोप में दंडस्वरूप प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई थी। कोर्ट ने मार्च 2026 में अधिकरण द्वारा पारित फैसले और आदेश के साथ-साथ याची को दी गई सजा रद कर दी है।
याची नरेश सिंह थाना खतौली, मुजफ्फरनगर में पुलिस चौकी प्रभारी थे। उनके खिलाफ आरोप था कि उन्होंने सात नवंबर 2023 को शादाब नामक व्यक्ति के घर से बड़ी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों को दोबारा विस्फोटक जमा किए जाने की जानकारी नहीं दी। शादाब के घर में 22 जनवरी 2024 को हुए विस्फोट में दो नाबालिग बच्चों की मौत हो गई थी।
याची ने अदालत में कहा कि वह केवल चौकी प्रभारी थे और विस्फोटकों की पहली बरामदगी से जुड़े मामले में विवेचक नहीं थे। उन्हें शादाब के घर पर दोबारा विस्फोटक जमा किए जाने की कोई जानकारी नहीं थी। राज्य सरकार ने इसके विपरीत दलील दी कि याची को अवैध पटाखा निर्माण की जानकारी थी, इसलिए उनसे कड़ी निगरानी रखने की अपेक्षा थी।
हालांकि हाई कोर्ट ने पाया कि रिकार्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं था, जिससे पता चले कि चौकी को विस्फोटकों के लाए जाने या जमा किए जाने के संबंध में कोई सूचना मिली थी। खंडपीठ ने कहा कि जब कार्रवाई के लिए कोई सूचना ही उपलब्ध नहीं थी तो कार्रवाई न करने को लापरवाही नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने माना कि विस्फोट होने के बाद याची ने तत्काल कार्रवाई की थी।
