सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंक गोपनीय नहीं, RTI के तहत बताए जा सकते हैं, इलाहाबाद HC का महत्वपूर्ण आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंक गोपनीय नहीं हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
कहा- तीसरे पक्ष की सहमति बिना भी आरटीआइ के तहत बताए जा सकते हैं अंक
भारत सरकार ,डीएलडब्ल्यू वाराणसी की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार
दूसरे अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका की छाया प्रति उपलब्ध कराना जरूरी नहीं
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्राप्त अंक गोपनीय नहीं हैं और सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआइ) के तहत तीसरे पक्ष की सहमति के बिना भी प्रकट किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा तभी किया जाना चाहिए जब सार्वजनिक हित से जुड़ा मामला हो। यह जरूरी नहीं है कि दूसरे अभ्यर्थियों की कापी की छाया प्रति उपलब्ध कराई जाय।
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अजित कुमार तथा न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने भारत सरकार और अन्य की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए केंद्रीय सूचना आयोग नई दिल्ली का वह आदेश रद कर दिया है जिसमें वाराणसी स्थित डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (डीएलडब्ल्यू) को कहा गया था कि वह उत्तर पुस्तिकाओं की फोटो कॉपी आवेदक को सुलभ कराए।
भारत सरकार और जन सूचना अधिकारी डीएलडब्ल्यू ने केंद्रीय सूचना आयोग के उन दो आदेशों को हाई कोर्ट में याचिका में चुनौती दी थी जो क्रमशः 13मई 2009 और चार जून 2009 को पारित किए गए थे। संतोष कुमार नामक व्यक्ति ने आरटीआइ अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन देकर खुद की तथा मनीष कुमार सिंह और गोरख शर्मा के अंकों और उनके उत्तर पुस्तिकाओं की फोटो कॉपी मांगी थी। 10 अक्टूबर 2008 को दिए गए इस आवेदन पर वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी ने प्रश्न पत्र की प्रति प्रदान की, लेकिन उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी देने से इन्कार कर दिया।
हालांकि संतोष कुमार को उत्तर पुस्तिका देखने की अनुमति दी थी, पर अंक नहीं बताए गए। आवेदक ने 23 अक्टूबर 2008 को अपीलीय प्राधिकारी केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष अपील की। अपील प्राधिकारी ने 13 मई 2009 के आदेश में कहा कि 30 जुलाई 2004 को हुई लॉ असिस्टेंट परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी आवेदक को दी जाए।
डीएलडब्ल्यू ने इसका अनुपालन करते हुए 28 मई 2009 को संतोष कुमार को तीन उम्मीदवारों के अंक बताए, लेकिन उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी देने की बजाय पुनर्विचार आवेदन दायर किया। कहा, केंद्रीय सूचना आयोग के पूर्ण बेंच के फैसले के क्रम में ऐसी जानकारी को आरटीआइ अधिनियम, 2005 की धारा 8(1) (जे) के तहत नहीं दिया जा सकता।
इस पुनर्विचार आवेदन चार जून 2009 को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि भारतीय रेलवे सार्वजनिक प्राधिकरण है, जिसका मुख्य कार्य परीक्षा आयोजित करना नहीं है, बल्कि पदों को भरने के लिए परीक्षा आयोजित करना है, इसलिए उत्तर पुस्तिकाएं प्रदान की जा सकती हैं। हाई कोर्ट में याची के अधिवक्ता कृष्णजी शुक्ल ने तर्क दिया कि आयोग के पूर्ण बेंच के फैसले को ठीक से नहीं समझा गया है, अन्यथा उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी पर जोर नहीं दिया जाता।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा, व्यक्तिगत जानकारी प्रकट करने से पहले यह देखना आवश्यक है कि यह सार्वजनिक हित में है और किसी की गोपनीयता का उल्लंघन नहीं करेगा। कोर्ट का कहना था कि यह सच है कि अगर एक उम्मीदवार दूसरे उम्मीदवार के अंकों के बारे में जानकारी मांगता है तो यह तीसरे पक्ष की जानकारी बन जाती है और इसलिए आरटीआइ अधिनियम, 2005 का नियम 11 लागू होता है। कोर्ट ने कहा, उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकापी देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आवेदक को पहले ही अंकों की जानकारी दी जा चुकी है। आवेदक ने भी उत्तर पुस्तिकाओं में अनियमितता का आरोप नहीं लगाया है।
