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इलाहाबाद HC के जज की नए टैक्स सिस्टम के खिलाफ याचिका मामला : केंद्र सरकार व विभाग से चार हफ्ते में मांगा जवाब

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 31 Jul 2026 01:48 PM (IST)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति संदीप जैन की याचिका पर केंद्र सरकार और आयकर विभाग से नए टैक्स सिस्टम में कानूनी ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. नए टैक्स सिस्टम के तहत कुल आय से कानूनी अलाउंस पर छूट न मिलने की चुनौती याचिका दाखिल है

  2. खंडपीठ ने भारत सरकार, सेंट्रल बोर्ड आफ डायरेक्ट टैक्सेस व आयकर विभाग से जानकारी मांगी थी

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप जैन की नए टैक्स सिस्टम के तहत अपनी कुल आय से कानूनी अलाउंस पर छूट न मिलने की चुनौती याचिका पर केंद्र सरकार व आयकर विभाग से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने भारत सरकार व सेंट्रल बोर्ड आफ डायरेक्ट टैक्सेस विभाग व आयकर विभाग से जानकारी मांगी थी।

विभाग के अधिवक्ता अंकुर अग्रवाल ने जानकारी दी और बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली टैक्स बार एसोसिएशन केस में कहा है कि नई स्कीम में अलग से उपबंध नहीं किया गया है। साथ ही जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा।

न्यायमूर्ति जैन ने नए टैक्स सिस्टम को चुनने के बाद अपनी कुल आय से हाई कोर्ट जज (सैलरी और सर्विस की शर्तें) अधिनियम, 1954 की धारा 22 डी के तहत तय कानूनी अलाउंस पर छूट न मिलने को चुनौती दी है। 22 डी हाई कोर्ट जज के ऑफिशियल घर, आने-जाने की सुविधाओं, सत्कार अलाउंस और लीव ट्रैवल कंसेशन की कीमत को आयकर से छूट देता है।

न्यायमूर्ति जैन ने जब नए टैक्स सिस्टम के तहत फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर-2) फाइल करने की कोशिश की, तो आयकर पोर्टल ने कथित तौर पर उन्हें कानूनी न्यायिक भत्ते के लिए 9.85 लाख रुपये की छूट का दावा करने की इजाज़त नहीं दी, जिससे पता चला कि यह फायदा सिर्फ पुराने टैक्स सिस्टम के तहत ही मिलता था।

इसके बाद न्यायमूर्ति जैन ने सीबीडीटी और केंद्रीय वित्त मंत्री को प्रत्यावेदन दिया। जवाब में, उन्हें सिर्फ 12 सितंबर, 2025 के ऑफिस मेमोरेंडम का जिक्र करते हुए एक कम्युनिकेशन मिला। मेमोरेंडम में कहा गया है कि नए टैक्स सिस्टम को चुनने वाले टैक्सपेयर ऐसी छूट क्लेम नहीं कर सकते क्योंकि यह सिस्टम पहले से ही लिबरल टैक्स स्लैब, कम टैक्स रेट और ज़्यादा रिबेट देता है। इसमें कहा गया है कि इसके अलावा छूट देना डबल फायदा देना होगा।

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