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वाराणसी में गंगा की लहरों पर इफ्तार करने वाले आठ आरोपितों को इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत, माफी मांगने पर सशर्त जमानत

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 15 May 2026 06:15 PM (IST)Updated: Fri, 15 May 2026 06:44 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी में गंगा की लहरों पर इफ्तार करने वाले आठ युवकों को माफी मांगने पर सशर्त ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का है आरोप, छह को अभी राहत नहीं

  2. इंटरनेट मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल हुआ था, 14 गए थे जेल  

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी में गंगा की लहरों पर इफ्तार करने वाले आठ आरोपितों की अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें सशर्त जमानत दे दी है। उनके खिलाफ गंगा की बीच धारा में नाव पर इफ्तार कर मांस खाने के बाद हड्डियां गंगा में फेंककर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है।

अलग-अलग याचिका पर कोर्ट का आदेश

न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की एकलपीठ ने पांच तथा न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने तीन आरोपितों की अलग-अलग याचिकाओं पर यह आदेश दिया है। अपने हलफनामे में आरोपितों ने माफी मांगी है। इस आधार पर उन्हें यह राहत दी गई है।

घटना का वीडियो हुआ था वायरल

इंटरनेट मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें कुछ युवक गंगा के बीचों-बीच चलती नाव पर बैठकर इफ्तार कर रहे थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 14 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जमानत अर्जी देने वाले आरोपितों के वकील ने मुवक्किलों को झूठा फंसाए जाने की बात कही। उनका कहना था कि एफआइआर में उनका नाम नहीं है।

भाजयुमो इकाई अध्यक्ष ने कोतवाली में की थी शिकायत

प्राथमिकी भाजयुमो वाराणसी इकाई के अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर कोतवाली में दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि इससे हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। वादी मुकदमा के अनुसार आरोपितों ने 15 मार्च को गंगा में नाव पर रोजा तोड़ने के बाद मांस खाया और बचा हुआ कचरा पवित्र नदी में फेंक दिया।

वाराणसी सत्र अदालत ने जमानत देने से मना कर दिया

आरोपितों के खिलाफ अलग-अलग धाराएं लगाई गईं, जिनमें भारतीय न्याय संहिता की पूजा स्थल को अपवित्र करना, धार्मिक भावनाएं भड़काना आदि धाराएं शामिल हैं। पहली अप्रैल को वाराणसी की सत्र अदालत ने आरोपियों को जमानत देने से मना कर दिया था। कोर्ट ने कहा था, ऐसा लगता है कि नीयत सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की थी।

इनकी सशर्त जमानत अर्जी मंजूर

न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला ने याची मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ और मोहम्मद अनस की जमानत अर्जी को मंजूर की है। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच ने याची मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान को जमानत देने का आदेश जारी किया है। अभी छह लोगों को जमानत नहीं मिली है।