APO भर्ती में आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर इलाहाबाद HC ने चार अहम सवाल तय किए
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) भर्ती में आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर चार सवाल तय किए। हाई कोर्ट में अगली सुनवाई सात सितंबर को होगी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
हाई कोर्ट में सात सितंबर को फिर होगी मामले की सुनवाई
एकलपीठ ने पंकज वर्मा व अन्य की याचिका पर सुनवाई की
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर चार सवाल तय किए हैं। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकलपीठ ने पंकज वर्मा व अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए कहा है कि ये सभी प्रश्न फिलहाल तात्कालिक हैं और पक्षकारों के अधिवक्ताओं की अंतिम बहस सुनने के बाद ही इन पर निर्णय लिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई सात सितंबर 2026 को होगी।
पहला और दूसरा सवाल क्या है?
अदालत द्वारा तय पहला सवाल यह है कि क्या भर्ती विज्ञापन के पैराग्राफ 16 में दी गई शर्त बिना किसी वैधानिक प्रावधान के मान्य ठहराई जा सकती है। दूसरा तय यह सवाल है कि "अनारक्षित श्रेणी" का अर्थ केवल अनारक्षित अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित श्रेणी है या इसे मेरिट के आधार पर खुली श्रेणी के रूप में भरा जाना चाहिए?
तीसरा व चौथा सवाल ये है
हाई कोर्ट ने तीसरा सवाल यह किया है कि प्रारंभिक परीक्षा के बाद सूची तैयार करते समय क्या यह केवल संबंधित श्रेणी के अभ्यर्थियों तक सीमित रहेगी या अनारक्षित श्रेणी में मेरिट के आधार पर भरी जाएगी। कोर्ट ने चौथा सवाल यह तय किया है कि क्या प्रारंभिक परीक्षा के स्क्रीनिंग चरण में चयन की प्रक्रिया शामिल मानी जाएगी?
अधिवक्ताओं ने दी दलीलें
याचीगण की ओर से अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने पक्ष रखा, जबकि राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और मनीष गोयल ने दलीलें प्रस्तुत कीं।
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