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मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों में संविदा पर निर्भरता चिंताजनक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई चिंता

Published: Fri, 25 Sep 2026 06:25 AM (IST)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों में संविदा नियुक्तियों पर चिंता जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. हाईकोर्ट ने मेडिकल-नर्सिंग कॉलेजों में संविदा नियुक्तियों पर चिंता जताई।

  2. राज्य सरकार को नर्सिंग कॉलेज शिक्षक सेवा नियमावली 2026 अधिसूचित करने का आदेश।

  3. महानिदेशक को रिक्त पदों और विज्ञापन स्थिति पर नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में नियमित नियुक्तियों की जगह संविदा और तदर्थ व्यवस्था को चिंताजनक बताया है तथा राज्य सरकार को नर्सिंग कालेज शिक्षक सेवा नियमावली 2026 का प्रारूप प्राथमिकता पर मंजूर कर तत्काल अधिसूचित करने का अंतरिम आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने श्रीनिवासन गांधी की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।

कोर्ट ने महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के हलफनामे को दयनीय स्थिति बताते हुए कड़ी टिप्पणी की। हलफनामे के अनुलग्नक-3 का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रदेश में 500 से अधिक पद संविदा पर भरे गए हैं, जबकि नियमित पद मात्र दो से तीन प्रतिशत ही हैं। करीब 25 प्रतिशत पदों पर कार्यवाहक प्राचार्य तैनात हैं। बार-बार मांगे जाने के बावजूद विभागाध्यक्षों का पूरा ब्योरा पेश नहीं किया गया।

कोर्ट ने कहा कि नियमावली बनाने के लिए सरकार से केवल मार्गदर्शन मांगने से ऐसा लगता है कि शासन और विभाग स्तर पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की जा रही है, गंभीर प्रयास नहीं हो रहे हैं। कोर्ट ने 15 अप्रैल 2022 के शासनादेश का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार संविदा नियुक्ति तीन साल से अधिक नहीं चल सकती।

कोर्ट ने कहा, अस्थायी व्यवस्था को अनिश्चित काल तक खींचना न्याय के हित में नहीं है। इससे संविदा कर्मियों के शोषण की आशंका बनी रहती है। कोर्ट ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के जग्गो बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला दिया, जिसमें ऐसी प्रथा को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना गया है।

महानिदेशक को अगली सुनवाई पर नया व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें प्रोफेसर न होने के कारण एसोसिएट या असिस्टेंट प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष बनाए जाने का चार्ट, प्रदेश के मेडिकल कालेजों में प्रोफेसर के रिक्त पदों की संख्या, रिक्त पदों के लिए भेजे गए अधियाचन का ब्योरा, जारी विज्ञापनों की वर्तमान स्थिति और जिन पदों का विज्ञापन नहीं हुआ उसके कारणों की जानकारी देनी होगी।

साथ ही यह भी बताना होगा कि कार्यवाहक प्राचार्यों वाले पदों के लिए विज्ञापन निकला है अथवा नहीं। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी।

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