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नारी निकेतन में रह रही युवती को दी पति के साथ जाने की अनुमति, हाई कोर्ट ने कहा- अपनी पसंद से रहना बालिग का अधिकार

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Sat, 24 Oct 2026 04:27 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी भी वयस्क को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने और पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का मौलिक अधिकार है।

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HighLights

  1. वयस्क युवती को अपनी पसंद से जीवन जीने का अधिकार।

  2. हाई कोर्ट ने युवती को पति के साथ जाने की अनुमति दी।

  3. उम्र निर्धारण के लिए अस्थि परीक्षण रिपोर्ट को माना गया।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी भी वयस्क को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन जीने और पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का मौलिक अधिकार है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निस्तारित करते हुए संत रविदास नगर की एक युवती को पति के साथ जाने की अनुमति दे दी है।

वह नारी निकेतन में रह रही थी। अदालत में उपस्थित युवती ने कोर्ट में स्पष्ट कहा कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है। वह न तो माता-पिता के साथ रहना चाहती है और न ही नारी निकेतन में।युवती के पिता ने बेटी के नाबालिग होने का दावा किया था।

इसके समर्थन में स्कूल का स्थानांतरण प्रमाणपत्र पेश किया गया, जिसमें जन्मतिथि 24 मई 2009 दर्ज थी। हाई कोर्ट ने कहा कि यह प्रमाणपत्र किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। आधार कार्ड को भी उम्र निर्धारण के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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कोर्ट ने अस्थि परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर युवती की उम्र 19 से 21 वर्ष के बीच मानते हुए उसे वयस्क माना। कोर्ट ने कहा कि वह अपनी इच्छा से रहने का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। हालांकि कोर्ट ने उम्मीद जताई कि युवती अपने माता-पिता से भी मुलाकात करेगी।