इलाहाबाद HC ने बच्ची की गवाही को माना अविश्वसनीय, दो हत्यारोपियों की उम्रकैद की सजा 39 साल बाद रद
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 39 साल पुराने हत्या के मामले में दोषी रामकुंवर और रामकेवल को बरी कर दिया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हत्या के 39 साल पुराने मामले में दोषी रामकुंवर तथा रामकेवल को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने अधीनस्थ न्यायालय द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा रद कर दी है।
खंडपीठ ने चश्मदीद बच्ची की गवाही को अविश्वसनीय माना। अभियुक्त जमानत पर है। उनके बांड रद करते हुए जमानतदारों को मुक्त कर दिया गया है।
मुकदमे से जुड़े संक्षिप्त तथ्य यह हैं कि 21/22 अक्टूबर 1985 की रात वाराणसी के बिशुनपुरा गांव की शनिचरी देवी अपनी दो छोटी बेटियों छह साल की प्रमिला और एक साल की लीला के साथ मीरजापुर-वाराणसी रोड के पास बहारानगंज में मृत मिली थीं।
दो लोगों पर हत्या का लगा था आरोप
आरोप था कि राम कुंवर ने चाकू से गला काटकर हत्या की और राम केवल ने उसे पकड़ रखा था। दोनों बच्चियों को मौके पर छोड़ दिया गया था, जो रोते हुए चुनार बस स्टैंड पहुंचीं।
चुनार थाने में 22 अक्टूबर 1985 को रिपोर्ट दर्ज हुई। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने 30 नवंबर 1987 को दोनों को आजीवन कारावास तथा पांच साल की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने कहा कि बच्ची प्रमिला का बयान घटना के चार साल बाद बिना शपथ दिलाए दर्ज किया गया।
बच्ची ने घटना के बाद 24 घंटे तक किसी को हत्या के बारे में कुछ नहीं बताया, जो अस्वाभाविक है। हथियार की बरामदगी भी संदिग्ध है।
कोर्ट ने कहा कि बाल गवाह की एकमात्र, विरोधाभासी और सिखाई हुई प्रतीत होने वाली गवाही पर सजा नहीं टिक सकती। अभियोजन संदेह से परे दोष साबित करने में विफल रहा। इसलिए अपील स्वीकार कर दोनों को बरी किया जाता है।
