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अधिमास या पुरुषोत्तम मास तीन वर्ष में क्यों होता है, इस विशेष महीने का महत्व और ज्योतिषीय रहस्य क्या है?

By Digital Desk Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 17 May 2026 04:30 PM (IST)

ज्येष्ठ अधिमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं, 17 मई से 15 जून तक रहेगा। यह सौर और चंद्र वर्ष ...और पढ़ें

अधिमास यानी पुरुषोत्तम मास का महत्व और ज्योतिषीय रहस्य है।

अधिमास यानी पुरुषोत्तम मास का महत्व और ज्योतिषीय रहस्य है।

HighLights

  1. अधिमास समय चक्र और ऋतुओं के बीच संतुलन बनाए रखने का सबसे बड़ा आधा

  2. भगवान विष्णु को समर्पित पुरुषोत्तम मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा 

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। ज्येष्ठ अधिमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा, जिसे जनमानस में मलमास, अधिमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह अतिरिक्त महीना हमारे समय चक्र और ऋतुओं के बीच संतुलन बनाए रखने का सबसे बड़ा आधार है।

ज्योतिषाचार्या  डाॅ. गीता त्रिपाठी की महत्वपूर्ण जानकारी

इंडियन काउंसिल आफ एस्ट्रोलाजिकल साइंसेज प्रयागराज चैप्टर की चेयरपर्सन ज्योतिषाचार्या पं. डाॅ. गीता त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय पंचांग सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति पर आधारित है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा 365 दिनों में करती है। चंद्रमा की कलाओं पर आधारित चंद्र वर्ष केवल 354 दिनों का होता है। हर साल सौर और चंद्र वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का यह अंतर तीन साल में बढ़कर एक महीने के बराबर (करीब 32 दिन) हो जाता है।

इस मास में यह कार्य शुभ फलदायी होता है

उन्होंने बताया कि इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे वर्ष पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे 'अधिमास' कहते हैं। बताया कि धार्मिक दृष्टि से यह महीना 'पुरुषोत्तम मास' कहलाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस महीने में श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ, विष्णु सहस्रनाम, दान, गोसेवा और व्रत-उपवास करना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।  

सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग का करेंगे निर्माण

जयश्री महाकाल सेवा ट्रस्ट की ओर से गंगा की निर्मलता और विकसित भारत के संकल्प के लिए सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण अधिमास में 17 मई से 14 जून तक होगा। भंडारे के साथ 15 जून को समापन होगा। इसके लिए शनिवार को नैनी में महाकाल घाट से कलश यात्रा निकाली गई।

कलश यात्रा निकाली गई 

अरैल लोकपुर से होते हुए यात्रा कॉटन मिल तिराहा, शंकर ढाल, मेवालाल बगिया, नई बाजार पीडीए कालोनी और रामनगर से होते हुए सोमेश्वर महादेव मंदिर तक पहुंची। यज्ञाचार्य कमला शंकर शास्त्री ने अध्यक्ष पवन द्विवेदी के साथ शिव संकल्प पूजन कराया। कलश यात्रा संचालन महासचिव रवि पाठक ने किया। सर्वेश मिश्र, प्रियदर्शी त्रिपाठी, कौशलेश त्रिपाठी, ललित नारायण त्रिपाठी, रोहन महरा आदि शामिल रहे।

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