प्रतापगढ़ : जिले से होकर प्रतिबंधित वन्य जीव कछुआ की तस्करी जारी है। रविवार को फिर उसी मालदा टाउन एक्सप्रेस पर तीन महिला तस्कर पकड़ी गई। इनके कब्जे से बैग में भरे 25 कछुए बरामद किए गए। आरपीएफ व जीआरपी ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की।

नई दिल्ली से मालदा टाउन जा रही ट्रेन में चोरी से कछुए ले जाने की भनक पर पुलिस सतर्क हो गई थी। ट्रेन के जंक्शन पर आते ही आरपीएफ के एसआइ संजय कुमार राय, कांस्टेबल धर्मेंद्र प्रताप सिंह, उर्मिला सिंह, रमाशंकर मिश्रा और जीआरपी एसओ फूल सिंह दल बल के पास जनरल बोगी को घेर लिया। अंदर जाकर चेक किया तो 10 बैग मिले, जो सीट के नीचे छिपाए गए थे। इनको खोलकर देखा तो कछुए मिले। बैग के साथ तीन महिलाओं को पकड़ा गया। उनको आरपीएफ थाने लाया गया। पूछताछ में महिलाओं का नाम लक्ष्मी पत्नी पप्पू, सीमा पत्नी राजू, कंचन पत्नी बबुआ पता चला। यह सभी सुलतानपुर जिले के कोतवाली देहात क्षेत्र के पकड़ी नामक गांव की हैं। यह कछुओं को हावड़ा ले जा रहीं थीं। वहां पर तस्कर गिरोह के सरगना को सौंपना था। पुलिस ने तीनों महिला तस्करों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर छानबीन तेज कर दी। कछुओं को सुपुर्द करने के सवाल पर कई घंटे तक वन विभाग व रेल पुलिस में विवाद होता रहा। बाद में बेचारे कछ़ुए सई नदी में छोड़े जा सके।

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भूखे थे वन्य जीव :

कछुए कई दिनों पहले से कैद किए गए थे। इस वजह से वह भूख प्यास से बेहाल थे। एक-दो कछुए की मौत भी हो गई। कुछ कछुए आपस में एक दूसरे के पैर और गर्दन का मांस नोचकर भूख मिटाने के लिए संघर्ष करते दिखे।

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अरे.इतने बड़े कछुए :

रविवार को बरामद 25 कछुओं में से 16 विशालकाय थे। उनकी चौड़ाई लंबाई डेढ़ से दो फिट के करीब देखी गई। बड़े कछुओं को देखकर तमाशबीनों के होश उड़ गए। वह कहने लगे कि पहली बार इतना बड़ा कछुआ देख रहे हैं। भूख प्यास से बेहाल कछुओं पर पानी डालकर उनको संजीवनी दी गई।

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पकड़ी गांव तस्करों का गढ़ :

सुलतानपुर जिले का पकड़ी गांव कछुआ तस्करों का गढ़ बना हुआ है। जितनी बार पुलिस कछुआ बरामद करती है उनमें अधिकांश बार पकड़े जाने वाले तस्कर इसी गांव के निकलते हैं। अभी दो दिन पहले इसी गांव के दो पुरुष व पांच महिलाओं को मालदा टाउन ट्रेन में गिरफ्तार किया गया था और 600 कछुए बरामद किए गए थे।

Posted By: Jagran

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