प्रतापगढ़ : ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाया गया है। इन शौचालयों के संचालन व देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह को दी गई है। इसके आवंटन में खेल हुआ है। यह खेल कोई एक, दो नहीं बल्कि आधा दर्जन से अधिक ब्लाकों की 50 से अधिक ग्राम पंचायतों में हुआ है। जब जांच हुई तो इसका राजफाश हुआ। फिलहाल इस मामले में कई प्रधानों व सचिवों की मिलीभगत से खेल होने की बात सामने आई है। जांच टीम गठित किए जाने की तैयारी चल रही है। जिले में 17 ब्लाक हैं। इसमें सदर, मंगरौरा, संडवा चंद्रिका, लक्ष्मणपुर, सांगीपुर, कुंडा, बिहार सहित अन्य ब्लाक शामिल हैं। इसके अंतर्गत एक हजार 193 ग्राम पंचायतें हैं। सभी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। संचालन के लिए गांव की स्वयं सहायता समूह को जिम्मेदारी दी गई है। पहले तो ब्लाक की रिपोर्ट के आधार पर जिला कार्यालय से आवंटन किया गया। हाल में ही बाबागंज, आसपुर देवसरा, बिहार सहित आधा दर्जन ब्लाक की 50 से अधिक ग्राम पंचायतों में बिना अधिकारियों की अनुमति के समूह में बदलाव कर दिया गया। प्रधान ने सचिव से रिपोर्ट लगवाकर अपने चहेते समूह को आवंटित करा दिया गया। डीसी एनआरएलएम डॉ. एनएन मिश्रा ने बताया कि कुछ ब्लाकों की दर्जनों ग्राम पंचायतों में शौचालय के आवंटन में गड़बड़ी किए जाने की शिकायत सामने आई है। मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही इसमें कार्रवाई की जाएगी। ---

नौ हजार रुपये के लिए हो रहा खेल प्रत्येक शौचालय की साफ-सफाई व केमिकल आदि खरीदने के लिए तीन हजार रुपये मिलते हैं। जबकि छह हजार रुपये महिलाओं को मानदेय के तौर पर दिया जाता है। हर माह कुल नौ हजार रुपये खर्च होता है।

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