संवाद सूत्र, प्रतापगढ़ : शहर में दर्जनों पुराने जर्जर मकान हादसों को बुलावा दे रहे हैं। शहर में चूने और पत्थर से बनी कई बड़ी इमारतें धराशायी हो चुकीं हैं तो कई अभी भी बड़े हादसों को बुला रही हैं। आमजन द्वारा प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराने के कई बार प्रयास किए, लेकिन अफसरों की नींद नहीं टूटी और ये इमारतें क्षेत्र में दहशत का पर्याय बन गई है। वहीं इनमें कुछ सरकारी इमारतें भी शामिल हैं।

जीर्ण-शीर्ण भवनों को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं

बता दें जीर्ण-शीर्ण इन भवनों को खाली कराने या जमींदोज करने की दिशा में स्थानीय प्रशासन गंभीर नहीं है। कई जर्जर भवनों में तो दफ्तर संचालित हो रहे या फिर परिवार रह रहे हैं। ऐसे में यह लापरवाही कभी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। लखनऊ में पांच मंजिला अपार्टमेंट ढहने के बाद भी यहां का स्थानीय प्रशासन सजग नहीं हुआ है। लखनऊ के वजीर हसन रोड पर पांच मंजिला अपार्टमेंट मंगलवार शाम को भरभराकर गिर पड़ा। इस हादसे में कई लोग दब गए।

आबादी के बीच खड़े हैं करीब 70 जर्जर भवन

आपको बता दें नगर पालिका क्षेत्र में आबादी के बीच खड़े करीब 70 जर्जर भवन हादसे का सबब बन सकते हैं। दशकों पुराने इन भवनों की मियाद पूरी हो चुकी है, इसमें अधिकांश खंडहर की शक्ल में बदल चुके हैं। बावजूद उन पर न तो भवन मालिक का ध्यान है और न ही निकाय की नजर पड़ती है। यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। जेल रोड, चौक, विवेक नगर, बलीपुर, दहिलामऊ सहित मोहल्लों के जर्जर भवन कभी भी ढह सकती है। हालांकि पालिका अपने बचाव के लिए ऐसे पहले ही भवन स्वामियों को नोटिस जारी कर चुकी है। ईओ राम अचल कुरील ने बताया कि हाल में ही नगर पालिका का चार्ज लिया। जर्जर भवन को लेकर जल्द ही कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

Edited By: Nirmal Pareek

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