प्रतापगढ़ । जल निगम के बंटवारे की वजह से शासन में लंबित कई प्रोजेक्ट अधर में लटक गए हैं। सब कुछ व्यवस्थित होने तक प्रोजेक्ट लंबित ही रहेंगे। जल निगम के पास हैंडपंप और पेयजल की योजनाओं को स्थापित करने का अभी तक जिम्मा था। जल निगम सांसद और विधायक निधि से प्रस्तावित हैंडपंप तो लगाता ही था, साथ ही शासन से आवंटित हैंडपंपों की स्थापना करता था। इसके अलावा गांव में पेयजल योजनाओं की स्थापना के लिए जल निगम को ही बजट आवंटित किया जाता था। पिछले तीन दशक में जल निगम ने ग्रामीण अंचल में करीब 150 पेयजल की योजनाएं की स्थापना की थी, जिसके द्वारा घरों तक पाइप लाइन बिछाकर पेयजल की आपूर्ति की जाती थी। समय के साथ देख-रेख के अभाव में अधिकांश पेयजल योजनाएं ठप पड़ गई। इस बीच करीब दो साल पहले जल जीवन मिशन योजना लागू हुई तो इन योजनाओं को एक बार फिर संजीवनी मिल गई। पहले चरण में ठप पड़ी दो दर्जन से अधिक योजनाओं को जल जीवन मिशन योजना के तहत ले लिया गया। वैसे जल निगम धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर दिख रहा है। पहले गांव में स्थापित की जाने वाली पेयजल योजनाओं के निर्माण का जिम्मा प्राइवेट कंपनी को सौंप दिया गया। अब जल निगम को दो भागों में बांट दिया गया है। महानगरों को जल निगम नगरीय में रखा गया है, जबकि छोटे जिलों को जल निगम ग्रामीण में। यहां का जल निगम ग्रामीण में रखा गया है, जो जल शक्ति मंत्रालय के अधीन काम करेगा। यह गांव में स्थापित होने वाली पेयजल योजनाओं का निर्माण और उसकी देख-रेख का काम करेगा। जबकि शहर में बिछने वाली सीवर लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की देख-रेख जल निगम प्रयागराज करेगा। इस समय जल निगम के बंटवारे को अंतिम रूप दिया जा रहा है, इस वजह से कोई नए प्रोजेक्ट स्वीकृत नहीं हो रहे हैं। यहां से शहर के चार बड़े नालों को जोड़ने का प्रोजेक्ट शासन को भेजा गया था, जो अब कुछ दिनों के लिए अधर में लटक गया है। -- --जल निगम को दो भागों नगरीय और ग्रामीण में बांट दिया गया है। प्रतापगढ़ जिले के जल निगम को ग्रामीण में रखा गया है, जो जल शक्ति मंत्रालय के अधीन काम करेगा और ग्रामीण अंचल की पेयजल योजनाओं की स्थापना व देख-रेख करेगा- घनश्याम द्विवेदी, अधीक्षण अभियंता, जल निगम प्रयागराज

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