लालगंज : वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए नियम के तहत बीएसएफ को सीमा से 50 किमी के अंदर गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती करने के अधिकार को दुर्भाग्यपूर्ण एवं संघीय ढांचे की पृष्ठभूमि में खतरनाक निर्णय करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस नए नियम से 50 किमी के दायरे में केंद्र एवं प्रदेश दोनों के अधिकारों पर ओवरलैपिग यानि आपसी टकराव का भी खतरा उठ खड़ा होगा। केंद्र सरकार इस निर्णय को फौरन वापस ले, ताकि देश के कई राज्यों की संवेदनशीलता को देखते हुए वहां शांति के लिए खतरा अथवा असंतोष पैदा न हो सके। उन्होंने कहा है कि भारत का लोकतंत्र संघीय ढांचे पर आधारित है। केंद्र की भाजपा सरकार उसी संघीय ढांचे पर प्रहार करते हुए संविधान की मूल आत्मा तक को नष्ट करने पर अमादा है। केंद्र के इस नए निर्णय से भाजपा की मंशा देश को गृह युद्ध की तरफ भी ढकेलने की साबित हो रही है। उन्होनें बतौर उदाहरण कहा कि पंजाब और राजस्थान सहित पूर्वोत्तर के तमाम राज्य की सीमाएं 50 किमी के दायरे में लगभग उस प्रदेश के बहुत जगहों पर बराबर होंगे। इस तरह यदि दो तरफ की सीमाओं पर बीएसएफ तैनात होगी तो उसका दायरा सौ किमी होगा। देश में ही आंतरिक सुरक्षा बलों के बीच यह स्थिति संवेदनशील और भ्रम पैदा करने वाली होगी। प्रमोद तिवारी ने कहा कि अरूणांचल प्रदेश, सिक्किम, नागालैंड, मेघालय, असम, पंजाब, जम्मू कश्मीर, राजस्थान तथा पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को तो केंद्र का यह असंवैधानिक निर्णय सीधे-सीधे धधकती आग में ढ़केलने जैसा है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी भूल सुधारे और केंद्र और प्रदेश के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न होने के खतरे का आकलन करते हुए इस गैरकानूनी अपने फैसले को रद्द करे।

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