प्रतापगढ़ : तहसील क्षेत्र के कोहड़ौर, मदाफरपुर, करैला बाजार सहित पट्टी-कोहड़ौर मार्ग पर बसे गांवों के किनारे लोग शाम होते ही पैरा-पराली को खेतों में ही जला रहे हैं। इससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है और आम लोगों को सांस लेने में भी कठिनाई हो रही है, लेकिन प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।

वैसे तो दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर सभी स्थानों पर अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश सरकार भी पैरा-पराली खेतों में जलाने को लेकर सतर्क है। इसके बावजूद क्षेत्र में पैरा-पराली जलाने का क्रम लगातार जारी है। क्षेत्र के कोहड़ौर, नरायनपुर, मदाफरपुर, करैला बाजार सहित अन्य स्थानों पर लोग रात में पराली को खेतों में ही जला दे रहे है। इससे वातावरण दूषित हो रहा है। दिन में तो मशीन द्वारा धान की कटाई की जाती है। जैसे ही शाम होती है कि जो पैरा खेतों में बचा रहता है उसे जला दिया जाता है। एसडीएम डीपी सिंह का कहना है कि खेत में पराली जलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। जो लोग इसका उल्लंघन करेंगे। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी।

नौ को दी गई नोटिस : बार-बार निर्देश के बाद भी किसानों द्वारा पराली जला कर वातावरण को प्रदूषित किए जाने से न रुकने पर प्रशासन ने गंभीर रुख अख्तियार करते हुए नौ लोगों को नोटिस भेजकर उनसे जवाब तलब किया है। नोटिस मिलने के बाद किसानों में खलबली मची हुई है। एसडीएम डीपी सिंह द्वारा क्षेत्र के किसानों को पराली जलाने से रोकने के निर्देश दिए गए थे। निर्देश के बाद भी कुछ लोगों द्वारा मनमानी करते हुए पराली जलाने की शिकायत मिलने पर एसडीएम डीपी सिंह ने कंसा पट्टी गांव के किसान रामलाल, गोपी, जगदीश, रमेश, फारुख नजीर अहमद, मोहम्मद कुद्दूस व रामदुलार सहित अन्य किसानों को नोटिस भेजकर रोक के बाद भी पराली जलाने के कारणों में जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस मिलने के बाद किसानों में हड़कंप मचा हुआ है।

Posted By: Jagran

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