प्रतापगढ़ : दूसरों को न्याय दिलाने का जिम्मा पुलिस पर है। अवैध कब्जे रोकना भी उसकी जिम्मेदारी है, लेकिन यहां तो गजब ही हो रहा है। खुद पुलिस ही सरकारी परिसर में दीवार तोड़कर घुस जा रही है। रोकने पर आंखें भी दिखा रही है। मामला जिला पंचायत कार्यालय से जुड़ा है।

आंबेडकर चौराहे के पास जिला पंचायत कार्यालय है। इसके एक हिस्से में अध्यक्ष का आवास बनाया गया है। उसके पीछे लान छोड़ा गया है, जिसमें कुछ सजावटी पौधे लगाए गए हैं। बीच में इंटरलाकिग सड़क भी है, जो अध्यक्ष के आवास के पिछले हिस्से से लान को कवर करते हुए सभागार के सामने गेट पर मिलती है। कार्यालय और आवास के चारों ओर काफी ऊंची चहारदीवारी बनी है। इसके बाहर अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी और पश्चिमी के आवास हैं। उनका निकास सिचाई विभाग रोड की तरफ है।

चार दिन पहले जिला पंचायत अध्यक्ष के आवास के पीछे एएसपी पश्चिमी के आवास के बगल से पंचायत की चहारदीवारी का कुछ हिस्सा पुलिस कर्मियों ने तोड़ दिया। उसमें दरवाजा लगाने के लिए जगह बनाने लगे। वह लान में आने के लिए यह सब कर रहे थे। इस बात की भनक पंचायत कर्मियों को लगी तो हड़कंप मच गया। अपर मुख्य अधिकारी पुनीत वर्मा ने अध्यक्ष जिला पंचायत उमा शंकर यादव तथा एसपी को मामले की जानकारी दी। अध्यक्ष के हस्तक्षेप से दरवाजा लगाने का काम रुक गया, लेकिन शुक्रवार को फिर पुलिसकर्मी मजदूर और रेत, सीमेंट लेकर वहां पहुंच गए। यह देख पंचायत के कुछ कर्मचारी वहां रोकने गए तो उनको आंख दिखाकर हट जाने को पुलिस कर्मियों ने कहा। धमकी से सहमे कर्मचारियों ने अध्यक्ष को सूचित किया। फिर अध्यक्ष ने एसपी से नाराजगी जताते हुए इसे रोकने को कहा। इतना होने के बाद काम फिर रुक गया। इसमें खास बात यह है कि पुलिस बिना किसी अनुमति या सूचना के दूसरे विभाग के परिसर में अपने अंदाज में अतिक्रमण करने की कोशिश कर रही है। यह मामला अब अध्यक्ष और आला अफसरों के बीच फंसा हुआ है। इधर पंचायत के कर्मचारी सीधे तौर पर पुलिस वालों को रोक पाने से बच रहे हैं, लेकिन मामला काफी गरम हो चुका है। अध्यक्ष उमा शंकर यादव शनिवार को मौके का जायजा ले सकते हैं। इस मामले में अपर मुख्य अधिकारी पुनीत वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जैसे ही कर्मचारियों ने जानकारी दी, हमने अध्यक्ष को बताया। इसके साथ ही एसपी को पत्र लिखकर अतिक्रमण रुकवाने का अनुरोध किया। इस मामले में एएसपी पश्चिमी दिनेश कुमार द्विवेदी का कहना है कि जल निकासी के लिए रास्ता बनाने के लिए किसी मजदूर को बुलाया गया था। उसने इतनी ज्यादा दीवार तोड़ दी कि वह दरवाजा लगने लगा। अतिक्रमण जैसा कोई मामला नहीं है। जिला पंचायत के ईओ से बात हो गई है, वह जैसा कहेंगे, वही होगा।

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