'मेलवा देखाय लइ आवा, बलम गोलगप्पा खियावा', अजगरा महोत्सव में गूंजी लोक संस्कृति की धुनें, बेल्हा की विरासत हुई जीवंत
प्रतापगढ़ के अजगरा महोत्सव में लोक संस्कृति की धूम रही, जहाँ कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं और दर्शकों का मन मोहा।

HighLights
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने अजगरा महोत्सव में दर्शकों का मन मोहा।
विधायक जीतलाल पटेल ने भी कजरी गाकर लोककला का प्रदर्शन किया।
अजगर बाबा मंदिर में पूजन और प्राचीन मेले की परंपरा का सम्मान।
जागरण संवाददाता, प्रतापगढ़। ग्रामीण मेले की लोक संस्कृति एक बार फिर अजगरा में झंकृत हो उठी है। मंगलवार से शुरू हुए अजगरा महोत्सव के पहले दिन से ही सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम मच गई। जब गीत गाया गया... मेलवा देखाय लइ आवा, बलम गोलगप्पा खियावा...तो लोग झूम उठे। तालियां बज उठीं।
सजे हुए मंच पर यश भारती पुरस्कृत संगीतज्ञ डॉ. शिवानी मातनहेलिया ने कई गीत गाए। लोग तब मगन होकर ताली बजाने लगे। इस दौरान विधायक विश्वनाथगंज जीतलाल पटेल भी अपनी कला को दिल में न रोक सके। माइक लेकर गाने लगे...हरे रामा वर्षा रितु आई, बहे पुरवाई रे हारी।
संस्कार ग्लोबल स्कूल व पीबी कालेज के बच्चों द्वारा प्रस्तुति दी गई। सामूहिक डांस को लोगों ने सराहा। राजकीय बालिका इंटर कालेज की बालिकाओं ने संयुक्त गीत प्रस्तुत किया... कैसे खेले जैबू सावन मा कजरिया, बदरिया घेरे आवे ननदी।
लोकगायक कल्लू निराला ने अपने सुरों से सबका ध्यान खींचा। कठपुतली का कार्यक्रम भी सराहा गया। मेला देखने के लिए भी लोग उमड़ पड़े व झूले पर भी चढ़े।
अजगर बाबा का किया पूजन
मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने धाम पहुंचने पर अजगर बाबा के प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर में दर्शन किया व सरोवर के तट पर दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद मंच पर गए। पुरातत्व संग्रहालय भी देखा।
संवाद की परंपरा को सशक्त करने का संदेश
महोत्सव में अनेक लोगों ने अपने विचार रखे। विधायक जीतलाल पटेल ने कहा कि अजगरा में आयोजित किया जा रहा डिबेट विचारों की प्रतियोगिता है। इस परंपरा को प्रतिवर्ष इसे सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ाने में सहयोग किया जाएगा। समाज को भी आगे आना चाहिए।
भाजपा जिलाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि इस स्थल को चर्चा में बनाए रखने के लिए निर्झर प्रतापगढ़ी के प्रयास को सराहा जाना चाहिए। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राममोहन मीना, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी, एमएलसी प्रतिनिधि अभिमन्यु सिंह व राज्य सभा सदस्य अमरपाल मौर्य के प्रतिनिधि राय साहब सिंह, ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि राकेश सिंह के साथ ही दिनेश सिंह ने भी सहभागिता की।
जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने लोकभाषा के कवि डॉ. निर्झर प्रतापगढ़ी की खुले मंच पर सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पुरातत्व एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने तथा अजगरा की ऐतिहासिक विरासत को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
संचालन डाॅ. मो. अनीस एवं धर्मेंद्र ओझा ने किया। महोत्सव में आए लोगों व मंत्री समेत अतिथियों ने पौराणिक स्थल, संग्रहालय, विभागीय प्रदर्शनी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उत्साहपूर्वक अवलोकन किया।
ऋषि पंचमी पर है मेले की प्राचीन परंपरा
द्वापर युग के स्थल अजगरा में यक्ष ने पांडवों से सरोवर में जल पीने से पहले प्रश्न पूछे थे, लेकिन युधिष्ठिर के अलावा उनके अन्य भाई उत्तर नहीं देने पर अचेत हो गए थे। जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर अजगरा धाम है। यहां पर ऋषियों के श्राप से ऋषि पंचमी के ही दिन अहंकारी राजा नहुष अजगर बनकर गिरे थे।
इसलिए ऋषियों के सम्मान में यहां पर हर साल मेला लगने की परंपरा शुरू हुई। यहां पर अजगर बाबा का मंदिर, सरोवर, ग्रामीण पुरातत्व संग्रहालय, वृक्ष जीवाश्म, उरिया बाबा की समाधि भी लोगों के लिए दर्शनीय है।
ग्रामीण लोक संस्कृति का संवाहक यह मेला प्राचीन काल से मेला लगता रहा है। कुछ साल पहले इसे महोत्सव का रूप दिया गया। कलाकार बुलाए जाने लगे। इस बार डिबेट को जोड़कर इस विरासत को और व्यापक किया गया है।
