रमेश त्रिपाठी, प्रतापगढ़ : बेल्हा के राजनीतिक क्षितिज पर तमाम सितारे निकले, लेकिन उनमें सबसे अधिक प्रकाशमान नक्षत्र के रूप में प. मुनीश्वर दत्त उपाध्याय ही रहे। उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए वर्ष 1955 में उन्हें प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। उपाध्याय जी वर्ष 1952 व 1957 में प्रतापगढ़ से दो बार सांसद हुए। उनकी प्रतिभा के सभी कायल थे। यही कारण रहा कि उन्हें संविधान निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया।

जिले के महामना कहे जाने वाले पंडित जी ने 22 शिक्षण संस्थानों की स्थापना कर पूरे जनपद में शिक्षा की अलख जगाई। स्वतंत्रता आंदोलन के समय महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन को मुनीश्वर दत्त ने गांव-गांव तक पहुंचा कर बापू के सपनों को साकार किया। आजादी के बाद दिल्ली में उन्होंने पं. जवाहर लाल नेहरू, सरदार बल्लभ भाई पटेल, डा. राजेंद्र प्रसाद के बीच सफलता पूर्व कार्य करते हुए उनमें अपनी एक अलग पहचान बनाई। संविधान के निर्माण में भी उन्हें निर्मात्री सभा का सदस्य बनाया गया। बेल्हा के एक मात्र उपाध्याय जी ही हैं जिनका हस्ताक्षर भारत के संविधान में है। सुप्रीम कोर्ट ने उपाध्याय जी उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि रहे। वर्ष 1966 में स्थानीय निकायों से उन्होंने राज्य विधान परिषद का चुनाव लड़ा और सफलता हासिल की। उनके मुकाबले मोहिसना किदवई चुनाव हार गई। यूपी में चंद्रभानु गुप्त के मंत्रिमंडल में पंडित जी को राजस्व मंत्री बनाया गया। वर्ष 1931 को जिले के कहला में किसानों पर गोली कांड के बाद उपाध्याय जी ने राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन व लाल बहादुर शास्त्री के साथ वहां जाकर किसानों को ढांढस बंधाया। बेल्हा के लोग आज भी उन्हें नहीं भूले हैं।

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