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प्रतापगढ़ : जगेसरगंज बैंक डकैती और जेल के हेड वार्डर की हत्या में फरार चल रहा 50 हजार का इनामी बदमाश तौकीर कोर्ट में सरेंडर करने की तैयारी में है। यह भनक लगते ही पुलिस अलर्ट हो गई है। पूरे दिन कचहरी के इर्द-गिर्द सादी वर्दी में सिपाही मुस्तैद रहते हैं।

कोहंड़ौर के व्यापारी भाइयों की हत्या में आरोपित शातिर बदमाश हब्बू सरोज, उसके दोस्त सद्दाम ने पुलिस और एसटीएफ का हर नेटवर्क फेल कर दिया। पुलिस को चकमा देने के लिए हब्बू सऊदी में रहने वाले अपने दोस्त इंजमामुल से धमकी दिलाता था। पुलिस दोनों को तमिलनाडु, मुंबई में खोजती रही और ये यूपी में ही रहकर लंभुआ की बैंक लूट, जगेसरगंज बैंक डकैती की घटना को अंजाम देते रहे। यही नहीं पुलिस को चकमा देकर हब्बू सरोज ने 12 दिसंबर और सद्दाम ने 17 जनवरी को कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

इन बदमाशों की तरह हसनमुल्ला और तौकीर भी बेहद शातिर निकले। सपा नेता मनीष पाल के भाई आशीष उर्फ जान पाल की हत्या करने के बाद हसन मुल्ला ने गड़वारा में शराब की दुकान में लूट, जोगापुर के आटो मोबाइल व्यापारी व सचौली में किराना व्यापारी को गोली मारकर लूट लिया। पुलिस एवं एसटीएफ हसनमुल्ला, तौकीर को तलाश करती रही और इन दोनों बदमाशों ने 27 दिसंबर 2018 को जेल रोड क्रा¨सग के पास हेड वार्डर हरि नारायण त्रिवेदी की गोली मारकर हत्या कर दी। एक सिपाही की से¨टग से 50 हजार का इनामी हसन मुल्ला तो पकड़ में आ गया। अब 50 हजार का इनामी बदमाश तौकीर भी कोर्ट में सरेंडर करने की तैयारी में है। पुलिस से भी से¨टग करने के प्रयास में है। तौकीर के सरेंडर करने की भनक लगने पर एसपी ने कोतवाली पुलिस और स्वाट टीम को अलर्ट कर दिया है। सादी वर्दी में सिपाही दिन में 10 बजे से शाम पांच बजे तक कचहरी के इर्द-गिर्द मुस्तैद रहते हैं।

कहां गया पुलिस का नेटवर्क : एक तरफ जहां पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर लोग आज भी कोसते रहते हैं, वहीं यह भी कहने से पीछे नहीं हटते कि जिसके पीछे पुलिस पड़ जाए तो फिर उसका बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। मगर प्रतापगढ़ की पुलिस इस मामले में भी कमजोर पड़ती दिखायी दे रही है। कहां गया पुलिस का वह नेटवर्क जब बदमाश की हर लोकेशन पुलिस की नजर में आ जाती थी। उस जमाने में न मोबाइल था और न ही पुलिस के पास आज की तरह हाईटेक प्रणाली। कभी पुलिस का हर मोहल्ले में अपना नेटवर्क हुआ करता था, जो अब खत्म हो चला है। पुलिस की खत्म होती धमक से अपराधियों का पुलिस विभाग में ही तगड़ा संपर्क है। अपने इसी प्रभाव के चलते वे कोर्ट में सरेंडर करने में सफल हो रहे अपराधियों की पीठ पर पुलिस के ही कुछ कर्मचारियों का हाथ है। एक बार फिर तौकीर के सरेंडर को लेकर उठी चर्चा भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है।

Posted By: Jagran

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