प्रतापगढ़ : बैंक प्रबंधन की लापरवाही से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना धड़ाम हो गई है। 308 समूह की ऋण की पत्रावली बैंक में जमा है। इसमें 81 पत्रावली पर ऋण की स्वीकृति मिल चुकी है। बाकी के बचे 199 पत्रावली बैंकों में लंबित पड़ी है। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। फाइल अपूर्ण होने पर बैंक प्रबंधन ने 28 फाइल वापस समूहों को कर दी। लंबित फाइलों पर स्वीकृति न मिलने से समूह की महिलाओं को ऋण नहीं मिल रहा है। इससे गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मंशा फेल साबित हो रही है। इस मामले को लेकर डीएम ने बैंक अफसरों को पत्र भेजकर लंबित पत्रावली को निस्तारित करने को कहा है।

गरीब महिलाओं को रोजगारपरक बनाने के लिए शासन से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना संचालित है। इसमें समूह द्वारा बैंक से ऋण लेने के लिए पत्रावली बैंक में भेजने का प्रावधान है। इसके बाद ही ऋण स्वीकृति मिलती है। जिले के बाबागंज ब्लाक क्षेत्र में समूह की 15 ऋण की पत्रावली बैंक में भेजी गई थी, जिसमें केवल सात की ही स्वीकृति मिली। इसी क्रम में मानधाता में 87 के सापेक्ष 24, बाबा बेलखरनाथ धाम में 122 के सापेक्ष 22, कुंडा में तीन के सापेक्ष एक, आसपुर देवसरा में नौ के सापेक्ष तीन, गौरा में 10 के सापेक्ष तीन, शिवगढ़ में आठ के सापेक्ष तीन, मंगरौरा में सात के सापेक्ष चार, सदर में 13 के सापेक्ष तीन, संडवा चंद्रिका में 17 के सापेक्ष पांच समेत अन्य ब्लाकों के कुल मिलाकर 308 समूह की ऋण की पत्रावली बैंक में भेजी गई थी। जिसमें 199 पत्रावली अभी तक लंबित है। कोरम पूरा न होने पर 28 फाइल वापस कर दी गई।

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पैसे फंसने का है डर :

आजीविका मिशन योजना के जरिए गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मंशा है। इसमें बैंकों की सबसे अहम भूमिका है। बैंक प्रबंधन को इस बात का डर है कि ऋण लेने के बाद कहीं गरीब महिलाएं पैसा वापस न कर पाई तो बैंक का पैसा फंस जाएगा। बैंक अफसर को रिकवरी करने में पसीना बहाना पड़ेगा। इस वजह से बैंक प्रबंधन लंबित पत्रावली पर स्वीकृति नहीं दे रहा है।

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समूहों की जो पत्रावली ऋण के लिए बैंकों में आ रही है। उसकी स्वीकृति मिल रही है। समय जरूर लग रहा है।

- अनिल कुमार, एलडीएम

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आपेक्षित सहयोग न मिलने से सैकड़ों पत्रावली बैंकों में लंबित पड़ी है। इसकी स्वीकृति के लिए डीएम द्वारा बैंक अफसरों को पत्र गया है।

- ओम प्रकाश, डीसी एनआरएलएम

Posted By: Jagran

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