पीलीभीत : जिला अस्पताल में पर्चा बनवाने से लेकर चिकित्सक से परीक्षण कराने और फिर दवा पाने में मरीजों को कई घंटे का समय लग जाता है। जिला अस्पताल में लंबे समय से चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। इन दिनों संक्रामक बुखार का प्रकोप फैला हुआ है लेकिन जिला अस्पताल की ओपीडी इकलौते फिजीशियन पर टिकी है। बुखार से पीड़ित बच्चों को तो बाल रोग विशेषज्ञ देख लेते हैं लेकिन बड़ों को इकलौते फिजीशियन के कक्ष में अपनी बारी आने के लिए काफी इंतजार करना पड़ता है।

जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 23 पद सृजित हैं लेकिन इधर, काफी समय से सिर्फ 11 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। कई का यहां से तबादला हो गया लेकिन उनके स्थान पर जिनकी नियुक्तियां हुईं, वे ज्वाइन करने ही नहीं आए। कई चिकित्सकों ने लंबा अवकाश ले लिया है और वे प्राइवेट प्रैक्टिस में व्यस्त हो गए हैं। इन दिनों शहर समेत पूरे जिले में संक्रामक बुखार का प्रकोप चल रहा है। दर्जन भर लोग इस बुखार की चपेट में आकर मौत के मुंह में समा चुके हैं। हालत यह है कि इन दिनों ओपीडी में मरीजों की संख्या एक हजार से ऊपर जा रही है। वैसे सामान्य दिनों में औसतन पांच-छह सौ मरीज ही ओपीडी में पहुंचते हैं। मरीजों की दिक्कत इसलिए बढ़ी, क्योंकि इस समय एक ही सीनियर फिजीशियन यहां कार्यरत हैं। उनके कक्ष में बुखार पीड़ितों की भीड़ लगी रहती है। मरीज अथवा उसके तीमारदार को पहले पर्चा बनवाने के लिए लाइन में लगना होता है। फिर पर्चा चिकित्सक के पास जमा करके अपनी बारी आने का मरीज इंतजार करते हैं। चिकित्सक के परीक्षण के उपरांत एक बार फिर लाइन में लगकर दवा के लिए इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में मरीज को ओपीडी में कई घंटे लग जाते हैं। सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल का कहना है कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए हर महीने रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाती है। जितने चिकित्सक यहां तैनात हैं, उन्हीं के माध्यम से मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने का प्रयास किया जाता है।

Posted By: Jagran