पीलीभीत,जेएनएन : जनपद में ऐसे सभी परिषदीय विद्यालयों में पोषण वाटिका तैयार की जा रही है, जिनमें स्कूल परिसर में ही आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के छोटे बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए इन्हीं पोषण वाटिकाओं में जैविक फल-सब्जी उगाई जा रही। यह सुविधा आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को मिलेंगी, जिससे अभिभावक बच्चों को सुपोषण देकर स्वस्थ बनाकर रखा सकें।

जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के कुल 1802 विद्यालय संचालित हो रहे हैं। करीब सात सौ विद्यालय ऐसे हैं, जहां आंगनबाड़ी केंद्र भी हैं, क्योंकि इनके अपने भवन अभी नहीं बन सके हैं। इन केंद्रों का संचालन स्कूल परिसर में ही हो रहा है। पांच साल से कम उम्र के बच्चे ही आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत हैं। पांच साल की आयु पूरी करने के बाद बच्चों को उसी स्कूल में प्रवेश दिलाया जाता है। स्कूलों में मध्याह्न भोजन और आंगनबाड़ी के बच्चों को पुष्टाहार की व्यवस्था पहले से ही हो रही है। बच्चों को मौसमी हरी सब्जियां और फल भी मिल सकें, जिससे उनका उचित ढंग से पोषण हो, किसी तरह कुपोषण की स्थिति न आए, इसके लिए विद्यालयों के परिसर में पोषण वाटिका स्थापित हुईं। शासन के निर्देश पर वाटिका की देखभाल करने की जिम्मेदारी संबंधित स्कूल में नियुक्त शिक्षकों को सौंपी गई है। स्कूल में इन दिनों केला, अमरूद, पपीता, पालक, मेथी, धनिया, लहसुन, बैंगन, लौकी, सहजन की फसलें हो रही हैं। विशेष बात यह है कि इन्हें पूरी तरह से जैविक विधि से उगाया जा रहा। किसी तरह की रसायनिक खाद व कीटनाशक का प्रयोग नहीं होता। विभागीय अधिकारियों के निर्देश हैं कि बच्चों के अभिभावकों को इन्हें सहजता से उपलब्ध कराया जाए।

बच्चों में कुपोषण की समस्या न पैदा हो। उन्हें उचित पोषण मिल सके। इसी को ध्यान में रखते हुए शासन ने स्कूलों में सुपोषण वाटिका तैयार कराने के निर्देश दिए थे। उसी क्रम में स्कूलों की वाटिका में फल-सब्जियां उगाई जा रही हैं।

- चंद्रकेश सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

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