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2 शिक्षकों की वो अनोखी सोच, जिसने बदली पीलीभीत के सरकारी स्कूलों की तस्वीर; CM योगी ने किया सम्मानित

Published: Fri, 04 Sep 2026 06:06 PM (IST)

पीलीभीत के दो शिक्षकों, संतोष कुमार खरे और सैयदा, ने अपनी मेहनत और नवाचार से सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल ...और पढ़ें

सैयदा और संतोष खरे

सैयदा और संतोष खरे

HighLights

  1. दो शिक्षकों के नवाचार ने बदली बेसिक शिक्षा की तस्वीर, जिले का बढ़ाया मान

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। सरकारी स्कूलों को लेकर अक्सर संसाधनों की कमी का रोना रोया जाता है, लेकिन जब शिक्षक में जुनून हो तो अभाव भी आड़े नहीं आता। जिले के दो शिक्षकों ने इसी सोच को सच कर दिखाया है। एक शिक्षक ने किताबों को प्रतियोगी परीक्षाओं से जोड़ा, माडल पेपरों से हजारों बच्चों का भविष्य संवारा।

ग्राम समाज की जमीन को विज्ञान पार्क में बदलने का सपना देखा और प्रदेश में बेसिक शिक्षा के पहले ड्रोन लैब की नींव रख दी। दूसरे ने अपनी तनख्वाह से प्रोजेक्टर और लैपटाप खरीदे, ग्रामीणों के सहयोग से फर्नीचर व लाइब्रेरी बनाकर और पुराने जर्जर भवन को निपुण विद्यालय में बदल दिया।

रंगोली कला से लेकर वर्कशीट तक, दोनों ने पढ़ाई को बोझ नहीं, उत्सव बना दिया। इनकी मेहनत की कहानी बताती है कि सरकारी स्कूल भी मिसाल बन सकते हैं, बस एक शिक्षक को अपनी कक्षा को अपना परिवार मानना होता है। इसमें एक शिक्षक को पहले ही राज्य शिक्षक पुरस्कार मिल चुका। वहीं, एक शिक्षक सैयदा शुक्रवार को गोरखपुर में सम्मानित हुईं।

तनख्वाह से संवारा स्कूल, मेहनत से बनाया निपुण

मरौरी ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरू की प्रधानाध्यापिका सैयदा को राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। 2008 में अमरिया में सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति के बाद सैयदा 2013 में पिपरिया अगरू आईं।

यहां उन्होंने अपनी तनख्वाह से प्रोजेक्टर, लैपटाप दिया, ग्रामीणों के सहयोग से फर्नीचर और 200 पुस्तकों की लाइब्रेरी बनाई। 152 बच्चों के लिए स्वयं वर्कशीट बनाकर पढ़ाई को रोचक बनाया। इससे पहली बार में ही सभी बच्चे निपुण हुए और विद्यालय निपुण घोषित हुआ।

1978 के पुराने भवन को कायाकल्प से संवारा, मंच बनवाया। वह रंगोली कला में भी माहिर हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तक उनकी 50 फीट लंबी बाघ थीम रंगोली की सराहना कर चुकी हैं।

बीएसए रोशनी सिंह ने इसे पूरे विभाग के लिए गौरव बताया। उन्हें शुक्रवार को गोरखपुर में होने वाले शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया।

103 बच्चों को छात्रवृत्ति दिलाई, ड्रोन लैब से भविष्य जोड़ा

कंपोजिट विद्यालय बरहा के सहायक अध्यापक संतोष कुमार खरे ने पढ़ाई से प्रतियोगिता तक का अभियान चलाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उनके मार्गदर्शन में राष्ट्रीय आय एवं योग्यता छात्रवृत्ति परीक्षा में 103 बच्चों का चयन हुआ। इन बच्चों के खाते में केंद्र से 49.44 लाख रुपये आए।

श्रेष्ठ योजना में आठ, अटल आवासीय में पांच, सर्वोदय में दो बच्चों ने आवासीय शिक्षा पाई। हिंदुस्तान ओलंपियाड में तीन, नेशनल साइंस ओलंपियाड के सेकंड लेवल में एक, नेहरू बाल विज्ञान प्रदर्शनी में दो और बाल विज्ञान कांग्रेस में दो बच्चों ने प्रतिभाग किया।

मिशन शिक्षण संवाद टीम से 70 माडल पेपर बनाकर यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ के हजारों बच्चों को लाभ दिया। पाठ्यपुस्तकों से 20 हजार वन लाइनर प्रश्नों का संकलन और सात संस्करण की पुस्तकें लिखीं।

डीएम से मिलकर दो बीघा जमीन विज्ञान पार्क के लिए विद्यालय के नाम कराई। यशकाबा कंपनी से 17 लाख की ड्रोन एंड आटोमेशन लैब स्थापित करने वाला प्रदेश में बेसिक का पहला स्कूल बना। इसके लिए उन्हें 2018 में राज्य शिक्षक सम्मान मिला।

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