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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में थमने लगा बाघों का खौफ! जानें कैसे 1,710 लाइटों ने बचाई इंसानों की जान

Published: Thu, 07 May 2026 05:48 AM (IST)

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों के हमले पिछले दो वर्षों में कम हुए हैं। बाघ मित्रों की जागरूकता, गांवों में लगी 1,710 लाइटें और वन प्रबंधन इसमें सहायक रहे।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में शावकों के साथ बाघिन। सौ से इंटरनेट मीडिया

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में शावकों के साथ बाघिन। सौ से इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. पांच वर्षों में बाघ के हमलों में 27 लोगों की हो चुकी मृत्यु, 13 लोग हुए घायल

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के घने जंगल में उगने वाली घास और गन्ने के पत्तों के बीच अंतर न कर पाने से बाघ अक्सर जंगल के बाहर निकल आते हैं। इससे मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन बाघ मित्रों की ओर से जागरूकता फैलाने और लोगों की सतर्कता की वजह से दो वर्षों से बाघ के हमले कम हो गए हैं।

गन्ना का सीजन होने पर अक्सर बाघों के हमले मानव पर बढ़ जाते हैं, लेकिन दो वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो पता चलेगा कि गन्ने का सीजन गुजर चुका है, लेकिन बाघ ने जंगल के बाहर मानव पर हमले कम किए। वर्ष 2023-24 में बाघ के हमलों में 14 लोगों की मृत्यु हो गई थी, जबकि चार लोग घायल हो गए थे।

इसके बाद वर्ष 2024-25 में तीन लोगों की मृत्यु व तीन ही लोग बाघ के हमलों में घायल हो गए थे। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में बाघ के हमले में छह लोगों की मृत्यु हुई, जबकि तीन लोग घायल हुए।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व: मानव-वन्यजीव संघर्ष के आंकड़े

वित्त वर्ष (Financial Year) मृत (Deaths) घायल (Injured) कुल हमले (Total Attacks)
2021-22 3 3 6
2022-23 1 0 2
2023-24 14 4 18
2024-25 3 3 6
2025-26 6 3 9
कुल (Total) 27 13 40

मानव वन्यजीव संघर्ष कम करने में पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास के गांवों में लगाई गईं 1,710 लाइटें की वजह से बाघ आबादी क्षेत्रों में कम गए, क्योंकि बाघ अधिकांश बार शिकार रात में करते हैं। रात में गांवों में रोशनी होने की वजह से वे कम गए।

इसके साथ जंगल में वाटर व ग्रासलैंड मैनेजमेंट की वजह से शाकाहारी बढ़े तो बाघों वहां पर शिकार की उपलब्धता बढ़ गई। इससे बाघों ने बाहर निकलना कम कर दिया।

इसके अलावा 66.92 किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग कराई गई, जबकि 275 वर्ग किलोमीटर की सीमा है, पीलीभीत टाइगर रिजर्व की। इसके अलावा सोलर फेंसिंग भी कराई गई। बाघ मित्रों के तय समय पर सूचना देने की वजह से वन विभाग की टीम ने निगरानी बढ़ाई, जिससे बाघ फिर से जंगलों में पहुंच गए। इससे मानव वन्यजीव संघर्ष कम हो गया।

 

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वन्यजीव वास स्थल प्रबंधन में घास का मैदान, पानी और सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए गए। जंगल में सुरक्षा और खाने-पीने की व्यवस्था होने लगी तो बाघ गन्ने के खेत में आते थे और अंदर चले जाते थे। इसमें बाघ मित्र ने आंख, कान और नाक का काम किया, जिससे बाघों के बाहर निकलने पर उनकी निगरानी की गई।

- पीपी सिंह, फील्ड डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व


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