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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में हाथियों का पक्का ठिकाना! 4 साल बाद भी बजट का इंतजार, आबादी में बढ़ा खौफ

Published: Mon, 14 Sep 2026 09:10 PM (IST)

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में हाथियों ने स्थायी डेरा जमा लिया है, लेकिन 2022 में हाथी रिजर्व का दर्जा मिलने के ...और पढ़ें

कलीनगर क्षेत्र में चहलकमी करता हाथी। फाइल फोटो

कलीनगर क्षेत्र में चहलकमी करता हाथी। फाइल फोटो

HighLights

  1. वर्ष 2022 में मिला था हाथी रिजर्व का दर्जा, चार वर्ष बाद भी धरातल पर नहीं शुरू हुई कवायद

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। पीटीआर के वनक्षेत्र अब हाथियों के लिए महज प्रवास स्थल नहीं, बल्कि स्थायी ठिकाना बन चुके हैं। हाथियों के अनुकूल पर्यावास को देखते हुए वर्ष 2022 में प्रदेश के अन्य चार जिलों के साथ जिले के वनक्षेत्र को मिलाकर तराई एलीफेंट रिजर्व का दर्जा दिया गया था।

उम्मीद थी कि इससे हाथियों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने में मदद मिलेगी। घोषणा के चार वर्ष बाद भी इस रिजर्व के प्रबंधन के लिए बजट नहीं मिल सका है। इससे हाथी अब जंगल की सीमाएं लांघकर आबादी के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं।

बीते दो वर्षों से पीटीआर की माला, महोफ और बराही रेंज में हाथियों ने अपना स्थायी डेरा जमाया हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों की आबादी और उनके व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए एक विशेष रणनीति, प्रशिक्षित टीम और पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता होती है।

मगर, बजट न होने से वन विभाग के पास हाथियों की सतत निगरानी और उन्हें रिहायशी इलाकों में जाने से रोकने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इसका नतीजा है कि बीते छह माह से पीटीआर के आसपास के रिहायशी इलाकों में हाथियों की आमद तेजी से बढ़ी है।

वर्तमान में माधोटांडा और सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र में विचरण कर रहे दो हाथियों का आक्रामक व्यवहार इसका प्रमाण है। संसाधनों की कमी के चलते वन विभाग इन हाथियों को वापस जंगल में खदेड़ने में नाकाम साबित हो रहा है।

हाथी आसानी से आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचकर फसलों व निर्माणों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वहीं, हाथियों की आवाजाही से बाघों से सुरक्षा के लिए लगाई गई चेनलिंक फेंसिंग को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है।

तैयार हो रहा विशेष एक्शन प्लान

मानव-हाथी संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग प्रदेश स्तर पर एक विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर रहा है। इसके तहत तराई एलीफेंट रिजर्व से सटे संवेदनशील ग्रामीण इलाकों में सोलर फेंसिंग और सेंसर आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जाएंगे।

हाथियों की सटीक लोकेशन ट्रेस करने के लिए उनके मुखिया को रेडियो कालर पहनाने और रैपिड रिस्पांस टीम को आधुनिक उपकरणों से लैस करने की रूपरेखा तैयार की है। इस योजना के लागू होने से पीटीआर समेत पूरे तराई क्षेत्र में हाथियों के उत्पात पर लगाम लग सकेगी।

 

जिन क्षेत्रों में हाथी की चहलकदमी है, वहां टीमें तैनात कर दी गई हैं। क्षेत्र में गश्त व निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। ग्रामीणों से भी अपील है कि वे सावधानी बरतें। हाथियों के आने पर तुरंत नजदीकी वन चौकी पर सूचना दें।

- भरत कुमार डीके, डीएफओ सामाजिक वानिकी


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