जागरण संवाददाता, पीलीभीत : धान का सीजन अब समाप्ति की ओर है। इसी कारण सेंटरों पर आवक काफी कम हो गई है। अलबत्ता सेंटरों पर धान बेचने वाले तमाम किसानों को अभी तक उनके बैंक खातों में भुगतान नहीं मिल सका है। शासन की धान क्रय नीति में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि धान की तौल कराने के 72 घंटे के भीतर संबंधित किसान के बैंक खाते में समर्थन मूल्य का पूरा भुगतान पहुंच जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। किसानों को अमूमन हफ्ते भर तक पैसे का इंतजार करना पड़ रहा है।

इस बार शासन की ओर से जिले को 3 लाख 9 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद करने का लक्ष्य आवंटित किया गया था। जिले की सभी कृषि उत्पादन मंडियों समेत अन्य स्थानों पर क्रय केंद्र तो पहली अक्टूबर को ही स्थापित हो गए थे लेकिन एक हफ्ते तक खरीद बिल्कुल नहीं हो सकी। जो किसान सेंटरों पर धान ले गए उसमें नमी अधिक बताकर लौटाया जाता रहा। बाद में खरीद में कुछ तेजी आई। जिला खाद्य विपणन अधिकारी अविनाश झा के अनुसार अब तक 2 लाख 94 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। हालांकि अभी तक खरीदे गए धान में से सिर्फ 60 हजार मीट्रिक टन चावल का ही भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में उतार हो सका है। इसी वजह से किसानों को मूल्य भुगतान में देरी हो रही है। दरअसल क्रय एजेंसियों को शुरुआती दौर में जो धनराशि धान खरीद के लिए दी गई, वह पहले ही व्यय की जा चुकी है, उसके बाद जो धान खरीद हुई, उसका चावल एफसीआइ के गोदामों में उतार हो जाने के बाद ही उसका भुगतान संबंधित क्रय एजेंसियों को मिलता है। तब क्रय एजेंसी संबंधित किसानों के खातों में धान के मूल्य का भुगतान भेजती है। 36 हजार किसानों से खरीदा गया धान

जिले में धान खरीद के लिए विभिन्न एजेंसियों के कुल 134 केंद्र स्थापित किए गए थे। इन सभी पर कुल 32 हजार पंजीकृत किसानों ने अपना धान बेचा। इसमें से अभी लगभग तीस प्रतिशत किसानों को धान का समर्थन मूल्य नहीं मिल सका है जबकि 72 घंटे के भीतर बैंक खाते में भुगतान पहुंच जाने का नियम तय किया गया था। क्रय एजेंसियों को एफसीआइ से चावल का भुगतान मिलने में कुछ देरी के कारण ऐसा हो रहा है। एफसीआइ के अधिकारियों से चावल के उतार में तेजी लाने के लिए कहा गया है। जल्द ही सभी किसानों के खातों में धान का समर्थन मूल्य भुगतान पहुंच जाएगा।

-अविनाश झा, जिला खाद्य विपणन अधिकारी

Posted By: Jagran

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