पीलीभीत,जेएनएन : जमीदार की जिस इकलौती वारिस की सेवा के लिए कभी महल में सुख सुविधाएं मुहैया थीं, उसे पहले तो नियति ने सड़क पर ला दिया। आसरा योजना में मकान मिला तो उसमें रहने का ज्यादा दिन सुख भी नसीब नहीं हो सका। इकलौते बेटे ने मां को कमरे में बंद कर दिया और कहीं चला गया। 25 दिन बाद मुहल्ले वालों की सूचना पर पुलिस ने मकान खुलवाकर बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान मौत हो गई।

अंग्रेजों की हुकूमत के दौरान नगर में सेवक राम दुबे सबसे धनी जमीदार के रूप में जाने जाते थे, उनके नाम पर मुहल्ला दुबे का नामकरण हुआ। जमीदार के कोई संतान नहीं थी। जमीदार के वारिस के तौर पर लली दुबे महल में रहा करती थीं, उन्हें तमाम सुख-सुविधाएं हासिल थीं। बाद में जब देश आजाद हुआ और जमीदारी खत्म हुई तब भी रामसेवक जमीदार के पास करोड़ों की संपत्ति थी, उनके निधन के बाद संपत्ति लली दुबे के नाम आ गई। यह संपत्ति अधिक दिनों तक नहीं रही। मुहल्ले के प्रभावशाली लोगों ने कब्जा जमाना शुरू कर दिया, जिससे घबराकर लली ने बहुत कम दामों में जमीन की बिक्री करनी शुरू कर दी। बाद में उन्होंने एक मंदिर के पुजारी से अपना विवाह कर लिया था। वैवाहिक जीवन में भी जल्द ही दरार पड़ गई। पति से अनबन होने पर वह अपने इकलौते बेटे पंकज दुबे के साथ किराए के मकान में रहने लगी थीं। बेटे को जब मुहल्ला दुर्गा प्रसाद में आसरा आवास मिला तो वह मां के साथ आकर रहने लगा। बाद में इकलौते पुत्र ने मानवता की सारी हदें उस समय पार कर दी जब वह उन्हें सहारा बनने के बजाय 25 दिनों तक ताले में कैद कर काम करने चला गया। आवास में कैद होने से बुजुर्ग महिला का स्वास्थ्य लगातार गिरता गया। गुरुवार को मुहल्ला वासियों की शिकायत पर पुलिस ने बंद आवास के ताले तोड़कर उन्हें सरकारी चिकित्सालय में भर्ती कराया। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान वृद्धा की सांसें थम गईं। पुलिस आरोपित बेटे पंकज की तलाश कर रही है।

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