पीलीभीत,जेएनएन: कोरोना संक्रमण के कारण सेवा से लेकर खाद्य सामग्रियां लगातार महंगी होती जा रही हैं। अनलाक में जैसे-जैसे बाजार खुले, वैसे-वैसे मंहगाई बढ़ती गई। विशेषकर दाल, मसाले व ड्राई फ्रूट्स की कीमतें बढ़ रही हैं। शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए खपत अधिक हो रही है।

दाल-सब्जी से लेकर ब्रश और दंत मंजन तक के दाम बढ़े हैं। अनलाक में जहां माल की आपूर्ति सहज हुई है, वहीं कंपनियों में भी काम धीरे-धीरे तेजी पकड़ रहा है। ऐसे में कीमत कम होनी चाहिए थी, लेकिन इसके उलट हो रहा है। व्यापारियों और उद्यमियों के पास कीमत में वृद्धि की कोई खास वजह नहीं है। आर्थिक तंगी से गुजर रहे आम लोगों के लिए महंगाई कोढ़ में खाज बनती जा रही है।

खुदरा व्यापारियों का कहना है कि डीजल महंगा हुआ तो माल भाड़ा 10 प्रतिशत तक बढ़ गया है। ऐसे में इसका बोझ ग्राहकों पर डालना मजबूरी है। यही कारण है कि थोक व खुदरा बाजार में सामान की कीमतों में काफी अंतर है। थोक बाजार की बात करें तो अप्रैल से अभी तक केवल सरसों तेल की कीमत में 30 रुपये का इजाफा हुआ है। वहीं आटा, दाल, चावल, चीनी आदि की कीमतें भी लगातार बढ़ी है।

दाम बढ़ा रहीं कंपनियां

एफएमसीजी (फास्ट मूविग कंज्यूमर गुड्स) कंपनियां भी अपने उत्पाद के दाम बढ़ा रही है। पिछले दो महीने में टूथ पेस्ट की कीमत में औसत 5-10 प्रतिशत, चाय पत्ती में 10-20 प्रतिशत, टेलकम पाउडर में 10 प्रतिशत, लिक्विड सोप में 15-20 प्रतिशत, शैंपू के बड़े पैक की कीमत में 10 प्रतिशत, कपड़ा धोने के डिटर्जेंट की कीमत में 5 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। ये सारे ऐसे प्रोडक्ट हैं जिनकी मांग कोरोना संक्रमण के दौरान बढ़ी है। इधर, एफएमसीजी कंपनियां कोरोना के कारण कॉस्ट कटिग के नाम पर कर्मचारियों को निकालने के साथ वितरकों का मुनाफा भी कम कर रही है। जैसे एक सौंदर्य क्रीम बेचने पर वितरक को 8.20 रुपये और दुकानदार को 12.90 रुपये की बचत होती थी। अब कंपनी ने कास्ट कटिग के नाम पर वितरक और दुकानदार की मार्जिन को कम कर दिया है। साथ ही माल ज्यादा से ज्यादा निकालने का दबाव भी बनाया जा रहा है। ऐसे में खुदरा व्यापारी भी परेशान हैं।

20 प्रतिशत तक बढ़ी मसालों की कीमत

कोरोना काल में दाल और सब्जी में तड़का लगाना भी महंगा हो गया है। लॉकडाउन से पहले और अनलाक में मसालों की कीमत में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। व्यापारी कहते हैं कि मांग में वृद्धि हुई है। मसालों को उपयोग काढ़ा बनाने में खूब हो रहा है। मसाला की थोक उत्पादक मंडियों में दाम बढ़ने के कारण खुदरा में भी तेजी आई है। मेवों के दाम में वृद्धि लगातार जारी है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इसकी मांग काफी बढ़ी है।

मसाला- पहले की कीमत- वर्तमान कीमत (रुपये/किलो) (खुदरा भाव)

जीरा-210= 225

काली मिर्च- 420-450= 450-500

बड़ी इलायची-600-800=650-850

दालचीनी- 750-800= 870-920

हल्दी- 180-200= 260-320

मिर्च- 100-120=140-160

धनिया- 150-190= 190-210

मेवा- कीमत (250 ग्राम/रुपये)(खुदरा भाव)

काजू- 225-250

पिस्ता- 250-300

बादाम- 200

किशमिश- 65-125

राशन- अप्रैल की कीमत-अक्टूबर की कीमत (थोक कीमत रुपये प्रति किलो)

आटा- 26- 28

चावल- 41- 46(फाइन)

चावल- 29- 32(मीडियम)

चावल- 25- 28(लो)

चना दाल- 60-80

अरहर दाल- 85 - 120

मसूर दाल- 80-100

मूंग दाल-120-110

चीनी-38- 36

सरसों तेल-101- 130(धनुष)

सरसों तेल- 108- 136(हाथी)

रिफाइंड-102- 110(फॉर्चुन)

रिफाइंड 98- 105(डालडा)

दालों पर महंगाई काफी बढ़ गई है। इसके अलावा, रसोई की दैनिक इस्तेमाल की वस्तुओं के दाम भी दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। बढ़ती महंगाई से आम आदमी को काफी दिक्कतें हो रही हैं।

- उर्मिला राठौर

कोरोना काल में लोगों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके बाद बढ़ती महंगाई कंगाली में आटा गीला जैसी साबित हो रही है।

- नीतू सिंह

खाद्य वस्तुओं पर लगातार महंगाई बढ़ती जा रही है। कम आमदनी वाले लोगों के लिए गुजारा करना मुश्किल होता जा रहा है।

- शालिनी गुप्ता

मेवा, मसालों, आटा व चावल के दामों में उछाल आता जा रहा है। हर माह दामों में बढ़ोतरी हो ही जाती है। आजकल तो दालों के दाम आसमान छू रहे हैं।

- मंजू शर्मा

Edited By: Jagran