पीलीभीत,जेएनएन : जिला मुख्यालय पर स्थित पश्चिमी उप्र की एकमात्र राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी का बजट दोगुना किए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अभी तक फार्मेसी को सालाना 50 लाख रुपये का बजट प्राप्त होता रहा है। पिछले दिनों सरकार ने अपने बजट में यहां की फार्मेसी के सु²ढ़ीकरण का प्रावधान किया था। उसी के तहत औषधियां तैयार करने वाली कुछ मशीनों के साथ ही मानव संसाधन बढ़ाए जाने के लिए अतिरिक्त बजट का प्रस्ताव भेजा गया है।

ललित हरि राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के अधीन ही फार्मेसी का संचालन किया जा रहा है। महाविद्यालय के प्राचार्य पर ही फार्मेसी के अधीक्षक का दायित्व रहता है। फार्मेसी में तैयार होने वाली आयुर्वेदिक औषधियों की आपूर्ति जिले के अस्पतालों के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, जेपीनगर, हापुड़, मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद समेत 17 जिलों में की जाती है। औषधियों की आपूर्ति के लिए संबंधित जिलों के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के माध्यम से मांगपत्र आता है। उसी के आधार पर औषधियां भेज दी जाती है। फार्मेसी में औषधियों के निर्माण के लिए लगभग पचास लाख रुपये का शासन से बजट स्वीकृत होता है। औषधियों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति के टेंडर मुख्यालय से ही होते हैं। जो कच्चा माल यहां भेजा जाता है। उसी से विभिन्न तरह के आसव, आरिष्ट, चूर्ण, टेबलेट्स आदि का निर्माण कराया जाता है। कोरोनाकाल में तो इस फार्मेसी में तैयार किया गया अमृतादि क्वाथ काफी लोकप्रिय रहा। जरूरतमंद लोगों को वितरित किए गए। शहर के अलावा जिले के गांवों में भी टीमों ने जाकर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले इस काढ़ा का वितरण किया। योगी सरकार ने अपने बजट में इस राजकीय फार्मेसी को सु²ढ़ करके औषधियों का निर्माण बढ़ाने की घोषणा की थी। उसी क्रम में बजट को दोगुना किए जाने तथा स्टाफ एवं संसाधन बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। फार्मेसी को जल्द मिलेगा पूर्णकालिक अधीक्षक

राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी के अधीक्षक पद की जिम्मेदारी अभी तक ललित हरि राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर राकेश कुमार तिवारी के पास रही है। अब शासन की ओर से इस पद के लिए पूर्णकालिक अधीक्षक की नियुक्त कर दी है। प्रोफेसर तिवारी के अनुसार अधीक्षक पद पर डा. प्रकाश चंद्र की नियुक्ति की गई है। जल्द ही वह अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे। फार्मेसी में कर्मचारियों की कमी है। साथ ही संसाधन भी बढ़ने हैं। फार्मेसी भवन के निकट ही नदी है। इससे बाढ़ आने पर नुकसान का खतरा रहता है। इन सभी बिदुओं को शामिल करते हुए बजट बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।

प्रोफेसर राकेश तिवारी, अधीक्षक राजकीय आयुर्वेदिक फार्मेसी