पीलीभीत : तराई क्षेत्र का पीलीभीत जनपद धान का कटोरा कहा जाता है। यहां से पैदा किए गए धान से बने चावल की सात समंदर पार मांग है। यहां के किसान धान की बड़े पैमाने पर पैदावार करते हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद दौरे के दौरान किसानों से धान का एक-एक दाना खरीदने का वादा किया था। उनकी मंशा के अनुरूप किसी तरह का काम नहीं किया गया। पारदर्शिता की आड़ में धान खरीद का गंदा खेल खेला गया। बगैर सेंटर खुले ही धान खरीद दिखा दी गई, तो पूरनपुर के हजारा क्षेत्र में एफसीआइ ने रिकार्ड तोड़ धान खरीद दिखा दी। धान खरीद को लेकर क्रय एजेंसियों के प्रबंधकों से लेकर क्रय प्रभारियों की सतर्कता झलकती है। जनपद में शुरुआती दौर में सरकारी क्रय केंद्रों पर धान नाममात्र को आया। सेंटर से किसानों को बहाना बनाकर टरकाया जाता रहा। जब धान की नमी 17 प्रतिशत तक आ गई, तो भी किसानों को कुछ न कुछ कमियां दर्शाकर लौटाया जाता रहा। इसका फायदा मंडी के आढ़तियों ने उठाया। मेहनत से उगाया गया धान किसानों को कम कीमत पर बेचना पड़ा। प्रशासनिक मशीनरी ने भी धान खरीद को लेकर कोई सख्त रुख अपनाया। सिर्फ निरीक्षण भी रस्म अदायगी भर हुए। किसी क्रय केंद्र प्रभारी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई तक नहीं की गई। सिर्फ स्पष्टीकरण मांगकर पल्ला झाड़ा गया। पीलीभीत विधायक संजय ¨सह गंगवार ने मंडी समिति के कई सेंटरों का निरीक्षण किया था, जिसमें खाद्य विभाग के सेंटर पर बड़े पैमाने पर खामियां पाई थी। इस मामले में डीएफएमओ को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब जिला मुख्यालय के सरकारी धान क्रय केंद्रों का यह हाल है, तो दूरदराज ग्रामीण इलाकों का हाल बदतर होगा। पिछले 12 नवंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रोग्राम लगा। रविवार होने की वजह से मंडी समिति में कोई भीड़भाड़ भी नहीं थी। कुछ किसान धान बेचने आए थे। मुख्यमंत्री योगी किसानों से सीधे रूबरू हुए थे। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया था कि एक-एक दाना धान का खरीदा जाएगा, तब तक सेंटर चलते रहेंगे। अन्नदाता का धान नहीं खरीदा गया। सिर्फ येन केन प्रकारेण लक्ष्य के करीब पहुंचने की कोशिश की गई। अन्नदाता धान की ट्रालियों को लेकर भटकता रहा। सरकारी धान खरीद केंद्रों की हकीकत जब खुली। दो दिन पहले उत्तर प्रदेश मंडी परिषद के एडीशनल डायरेक्टर जितेंद्र प्रताप ¨सह ने मंडी समिति के क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया था। खाद्य विभाग के सेंटर पर उपलब्ध परचेज रजिस्टर पर पंद्रह दिसंबर को 325 कट्टा धान खरीद फर्जी दर्शा दी गई। पंद्रह दिसंबर को 825 कुंतल दर्शाई गई। रजिस्टर में अधिकांश किसानों के मोबाइल नंबर भी नहीं पड़े थे। ऐसे में फर्जी खरीद की पुष्टि हो गई और कार्रवाई के आदेश हो गए। सरकारी केंद्र पर फर्जी धान खरीद को देखकर एडी अवाक रह गए। उन्होंने क्रय केंद्र प्रभारी को जादूगर की संज्ञा दे दी। बोले- क्या जादूगरी है? बगैर खरीदे ही खरीद हो गई ? इस पर क्रय केंद्र प्रभारी चुप्पी साधे रहा। ऐसा ही एक मामला भारतीय खाद्य निगम के कबीरगंज सेंटर का पकड़ा गया। वहां पर धान की उत्पादकता ही नहीं है, लेकिन सेंटर पर 20 हजार कुंतल धान खरीद दर्शा दी गई, जबकि लक्ष्य 25000 ¨क्वटल का दिया गया था। इस मामले की जांच डीएफएमओ कर रहे हैं। पूरनपुर क्षेत्र के एक गांव में पीसीएफ ने बगैर सेंटर खोले ही धान खरीद कर ली थी। इस मामले में भी कार्रवाई हुई। इस तरह जनपद में धान खरीद में फर्जीवाड़ा हावी रहा।

फैक्ट फाइल

जनपद में धान खरीद लक्ष्य : 346000 मीट्रिक टन

जनपद में अब तक धान खरीद : 271106.07 मीट्रिक टन

खरीद एजेंसियों की संख्या : 9

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप