इंजीनियर युवराज की मौत के 12 अधिकारी कुसूरवार! SIT ने CM योगी को सौंपी जांच रिपोर्ट, रेस्क्यू टीम पर कई सवाल
नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की पानी में डूबने से हुई मौत की एसआईटी रिपोर्ट शासन को सौंप दी ...और पढ़ें
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इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में एसआईटी ने जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपी।

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जागरण संवाददाता, नोएडा। सेक्टर-150 स्थित एससी 02 ए-3 पर माॅल के बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लाॅट में भरे पानी में डूबने से साॅफ्टवेयर इंजीनियर Yuvraj Mehta की मौत की जांच रिपोर्ट SIT ने शासन को सौंप दी है। सूत्रों की मानें तो एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में माना है कि युवराज को बचाने में वहां मौजूद बचाव दल से चूक हुई है।
इसके लिए एक दर्जन लोगों को जिम्मेदार माना गया है। इनमें प्राधिकरण, एसडीआरएफ, दमकल और कुछ पुलिस कर्मी शामिल है। गेंद अब शासन के पाले हैं। सभी की नजर प्रदेश सरकार के निर्णय पर टिकी है।
बता दें कि युवराज मेहता की माॅल के बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लाॅट में भरे पानी में कार समेत डूबने से मौत हो गई थी। पानी में कार गिरने के बाद युवराज ने अपने पिता को फोन किया था। पिता 15 मिनट में वहां पहुंच गए।
उन्होंने पुलिस, दमकल, एसडीआरएफ को फोन कर मौके पर बुलाया। आरोप है कि युवराज करीब दो घंटे तक कार के ऊपर लेट कर पिता और बचाव दल से पानी से निकालने की गुहार लगाता रहा।
सीएम योगी ने गठित की थी एसआईटी
वहां मौजूद एसडीआरएफ, दमकल व पुलिस आदि के 80 जवान मौजूद थे। ठंडा पानी होने एवं पर्याप्त संसाधन न होने की वजह से कोई भी पानी में नहीं उतरा। एक डिलीवरी ब्वाॅय मुनेंद्र पानी में उतारा, लेकिन तब तक युवराज डूब चुका था।
मामले की जांच और घटना में जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी ने पांच दिन में अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन के समक्ष प्रस्तुत कर दी है।
विभागों ने एसआईटी को 700 पन्नाें की रिपोर्ट दी थी
सूत्रों का कहना है कि प्राधिकरण, पुलिस, प्रशासन की ओर से 700 पन्नों की रिपोर्ट एसआईटी को सौंपी थी। इसमें दुर्घटना के लिए एक दूसरे विभाग को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास किया गया है।
एसआईटी रिपोर्ट में लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज किए गए हैं। माना जा रहा है कि दोषी पाए जाने वालों पर निलंबन, विभागीय कार्रवाई की जा सकती हैं।
जलभराव से जुड़ी प्लानिंग, स्टार्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम, कंट्रोल रूम की माॅनिटरिंग, रेस्क्यू रिस्पास टाइम और मौके पर तैनात अधिकारियों की भूमिका का विस्तृत जांच हुई है।
एसआईटी ने इन सभी दस्तावेजों का बारीकी से विश्लेषण किया है। जांच के दौरान सबसे अहम सवाल यह रहा कि हादसे के दौरान युवराज को बाहर निकालने में दो घंटे क्यों लग गए।
खनन विभाग ने सबसे अंत में सौंपी रिपोर्ट
एसआईटी ने संबंधित प्लाॅट से मिट्टी का खनन करने के लिए प्रशासन से कब अनुमति ली, इसकी भी जानकारी खनन विभाग से ली है। कितनी रायल्टी जमा की। कितने फीट तक मिट्टी निकालने की अनुमति थी। कब तक अनुमति थी।
अनुमति से अधिक मिट्टी तो नहीं निकली। कब खनन हुआ। यदि अनुमति से अधिक खनन हुआ तो पुलिस और प्रशासन ने क्या कार्रवाई की। खनन विभाग ने इसकी समुचित रिपोर्ट बनाकर एसआईटी को सबसे अंत में सौंपी।
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