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इंजीनियर युवराज को याद कर पिता बोले-जिम्मेदारों ने बेटे को भगवान भरोसे छोड़ा, दो घंटे करता रहा संघर्ष

Published: Sat, 24 Jan 2026 06:08 PM (IST)

ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। उनकी याद में ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, ग्रेटर नोएडा। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को लेकर एक ओर जहां हर रोज नए-नए विभागीय लापरवाहियों के खुलासे हो रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर स्थानीय लोगों की नाराजगी बढ़ती ही जा रही है। युवराज की याद में शनिवार को एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे। इसी सभा में अपने मन का दुख बताते हुए मृतक के पिता ने कहा, 'जिम्मेदारों ने बेटे को भगवान भरोसे छोड़ दिया, जबकि वह दो घंटे तक संघर्ष करता रहा था।' इस दौरान वहां मौजूद लोगों के चेहरे पर गम और आंखों में आंसू नजर आए। यह सभा नोएडा सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसायटी में की गई।

लोगों से बोले-सांत्वना और साथ देने के लिए धन्यवाद

इन दिनों हर तरफ इंजीनियर युवराज की मौत से दो घंटे तक होती रही जंग और उसे तड़पता देख चुपचाप खड़े रहने वाले तीन विभागों के अधिकारियों की चर्चा हो रही है। उस रात सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता के चश्मदीद बने युवराज के पिता राजकुमार मेहता ने इस श्रद्धांजलि सभा में लोगों के सामने अपनी शोकसंतप्त संवेदना व्यक्त की। उन्होंने बेटे की मौत के बाद लोगों की ओर से मिली सहानुभूति और एसआईटी की जांच पर संतोष जताया। 

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इस श्रद्धांजलि सभा में उन्होंने कहा कि हादसे के बाद जिस तरह से लोगों ने बढ़-चढ़कर इस मामले को सोशल मीडिया और आंदोलन के माध्यम से उठाया, उसी का परिणाम है कि अब सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर कार्रवाई की जा रही है। राजकुमार ने कहा, 'बेटे की मौत के बाद आप सबका इस तरह से सहयोग देने के लिए मैं आभार प्रकट करता हूं।'

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युवराज की मौत का जिम्मेदार कौन?

बता दें कि नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र में 16 जनवरी की देर रात नोएडा के सेक्टर-150 के पास एटीएस ली-ग्रैंडिओस के 90 डिग्री वाले मोड़ पर निर्माणाधीन माॅल के बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में डूबकर कार सवार साॅफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता (27) की मौत हो गई थी। मोड़ के पास कार अनियंत्रित होने से यह हादसा हुआ था। उस रात घना कोहरा भी छाया हुआ था।

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अंतत: युवराज की चली गई जान

खुद को मुसीबत में देखकर युवराज ने अपने पिता को किसी तरह कॉल किया। बेटे की आपबीती सुनकर पिता फौरन मदद के लिए दौड़ पड़े। उन्होंने पुलिस को फोन किया। इसके बाद घटनास्थल पर करीब दो घंटे तक युवराज को बचाने के लिए वे दमकल, एसडीआरएफ और पुलिस के अफसरों से मिन्नतें करते रहे। मगर वे सुविधाओं की कमी का रोना रोकर मूकदर्शक बने रहे। अंतत: युवराज की करीब 30 फीट गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई थी। 

सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे शहरवासी

इसी के बाद से इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को लेकर लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जाने लगी। इसी कड़ी में शनिवार को एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया था।

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