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यमुना के लिए 18,600 करोड़ का मास्टरप्लान, दिल्ली से आगरा तक हटेंगे गंदे नाले; यूपी में सबसे बड़ा सीवेज गैप

Published: Wed, 23 Sep 2026 11:51 AM (IST)

केंद्र सरकार ने यमुना को प्रदूषण मुक्त करने के लिए 18,600 करोड़ रुपये से अधिक का नेशनल एक्शन प्लान तैयार ...और पढ़ें

नोएडा के ओखला बैराज के पास यमुना में फैली प्रदूषण रुपी झाग। जागरण

नोएडा के ओखला बैराज के पास यमुना में फैली प्रदूषण रुपी झाग। जागरण

HighLights

  1. केंद्र सरकार ने यमुना सफाई के लिए 18,600 करोड़ का प्लान बनाया

  2. यमुना में प्रतिदिन 1,755.80 एमएलडी सीवेज का ट्रीटमेंट नहीं होता

  3. उत्तर प्रदेश में सीवेज ट्रीटमेंट का सबसे बड़ा गैप मौजूद है

कुंदन तिवारी, नोएडा। यमुना को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने 18,600 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाला नेशनल एक्शन प्लान तैयार किया है। यह योजना सुप्रीम कोर्ट के 21 मई 2026 के आदेश के बाद बनाया गया है।

गृह मंत्रालय की ओर से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया है कि यमुना कैचमेंट में प्रतिदिन 7,999.63 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) घरेलू सीवेज निकलता है, जिसमें से 6,243.83 एमएलडी का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। इसके बावजूद 1,755.80 एमएलडी का ट्रीटमेंट गैप बना हुआ है।

यूपी में सबसे बड़ा सीवेज गैप

पर्यावरणविद अभिष्ट कुसुम गुप्ता ने बताया कि गृह मंत्रालय की प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट गैप उत्तर प्रदेश में है। इसके बाद हरियाणा और दिल्ली का स्थान है।

यमुना बेसिन में 520 बड़े नालों की पहचान की गई है, जो बिना ट्रीटमेंट का पानी नदी में छोड़ रहे हैं। दिल्ली से लगभग 5,188 एमएलडी, उत्तर प्रदेश से 2,972.66 एमएलडी और हरियाणा से करीब 1,493 एमएलडी पानी प्रमुख नालों के माध्यम से निकल रहा है। गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, आगरा, मथुरा, गुरुग्राम और फरीदाबाद को प्रमुख प्रदूषण हाटस्पाट के रूप में चिह्नित किया गया है।

125 नए एसटीपी बनाने का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन 2,700.26 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है, जिसमें 940.03 एमएलडी का ट्रीटमेंट गैप है। ग्रामीण क्षेत्रों में 101.563 एमएलडी सीवेज निकलता है, जिसमें 23.769 एमएलडी का गैप है।

उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 6,343.20 टन नगर ठोस कचरा निकलता है, जिसका पूरा कलेक्शन किया जा रहा है। योजना के तहत हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 20 मौजूदा एसटीपी को अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें लगभग 1,521.13 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसके अलावा 125 नए एसटीपी और विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम बनाने का प्रस्ताव है, जिनकी कुल क्षमता लगभग 4,401.30 एमएलडी होगी। इसके लिए 19,621.75 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।

डेयरी वेस्ट भी बड़ा कारण

रिपोर्ट में डेयरी वेस्ट को भी यमुना प्रदूषण का एक बड़ा कारण बताया गया है। पूरे कैचमेंट में प्रतिदिन 3,637.49 टन डेयरी वेस्ट निकलता है, जिसमें से केवल 1,581.14 टन ही कलेक्ट और ट्रीट किया जा रहा है।

दिल्ली में 37 एसटीपी में से 28 निर्धारित मानकों का पालन कर रहे हैं, जबकि नौ एसटीपी मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। वजीराबाद से ओखला तक का क्षेत्र सबसे अधिक प्रदूषित पाया गया है।

ई फ्लो की अधिसूचना दिसंबर तक

यमुना में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए दिसंबर तक ई फ्लो की अधिसूचना तैयार करने का प्रस्ताव है। उत्तर प्रदेश में 204 वेटलैंड और जल निकायों को संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए चिह्नित किया गया है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यमुना एक्शन प्लान में दिल्ली के नदी तल, फ्लड प्लेन या नालों पर मौजूद अतिक्रमण को हटाने का कोई प्रस्ताव शामिल नहीं है।

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