विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पश्चिमी एशिया में तनाव ने तोड़ी भारतीय निर्यातकों की कमर, 10 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान

Published: Wed, 01 Apr 2026 08:26 PM (IST)

पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ग्रेटर नोएडा और आसपास के भारतीय निर्यातकों को 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI Generated

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI Generated 

HighLights

  1. मुंद्रा, कांडला समेत बंदरगाहों पर करोड़ों का माल फंसा हुआ

  2. लंबे शिपिंग routes से परिवहन लागत, बीमा प्रीमियम बढ़ा

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति ने भारतीय निर्यातकों की कमर तोड़ दी है। विशेष रूप से ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्र के निर्यातकों को दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का सीधा नुकसान झेलना पड़ रहा है।

बंदरगाहों-जहाजों पर फंसा है करोड़ों के ऑर्डर

विभिन्न बंदरगाहों और समुद्री जहाजों में करोड़ों रुपये का शिपमेंट फंसा हुआ है, जो एक माह बीत जाने के बाद भी खरीदारों तक नहीं पहुंच पाया है। तैयार माल रास्ते में अटका होने से निर्यातकों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

स्थानीय निर्यातकों का कहना है कि रेड सी और हार्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर खतरा बढ़ने से शिपिंग कंपनियां वैकल्पिक लंबी दूरी का रास्ता अपनाने को मजबूर हैं। इससे परिवहन खर्च कई गुना बढ़ गया है। एक निर्यातक ने बताया हमने माल तो भेज दिया, लेकिन अब वह महीनों तक समुद्र में घूम रहा है।

किराया चुकाना पड़ रहा है, जबकि पेमेंट अटका हुआ है। इससे हमारी पूंजी फंस गई है और नया ऑर्डर लेना मुश्किल हो गया है। कई शिपमेंट अब लंबे मार्ग से भेजे जा रहे हैं, जिसमें समय और किराया का भी करीब दोगुना हो गया है। इससे इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोडक्ट्स और अन्य वस्तुओं के निर्यात पर गहरा असर पड़ा है।

छोटे-मध्यम निर्यातकों की स्थिति और खराब

कुछ निर्यातक तो तैयार माल को घरेलू बाजार में कम दामों पर बेचकर घाटे की भरपाई की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, शिपमेंट का बीमा प्रीमियम में भी भारी उछाल आया है, जिससे छोटे-मध्यम निर्यातकों की स्थिति और खराब हो गई है। सरकार और निर्यात संगठनों से सहायता की मांग तेज हो रही है। निर्यातक संघों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो हजारों रोजगार प्रभावित होंगे और निर्यात लक्ष्य धराशायी हो जाएगा।

तनाव के कारण कई बंदरगाहों पर करोड़ों रुपए का माल फंसा हुआ है। विदेशी के साथ भारतीय बंदरगाहों कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों पर ही करीब 345 करोड़ रुपए से अधिक का माल फंसा हुआ है। इन्हें ईरान जाने वाले मार्ग होकर भेजा जाना है। इसी तरह से अन्य बंदरगाहों व जहाज पर भी करीब दस हजार करोड़ का आर्डर फंसा हुआ है। - राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आइआइए

ईपीआइपी का करीब 70 प्रतिशत उत्पाद विदेशी बाजार में निर्यात किया जाता है। इस वजह से पश्चिम एशिया युद्ध के कारण बड़े पैमाने पर निर्यातकों के माल रास्ते में फंसा हुआ है। रास्ता बंद होने से यह खरीदार तक कब पहुंचेगा इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। समय पर आर्डर न मिलने से पैनाल्टी का भी खतरा मंडराने लगा है।- विकास शर्मा, महासचिव, चैंबर्स आफ एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन गौतमबुद्ध नगर