नोएडा में सुपरटेक खरीदारों को बड़ी राहत की उम्मीद, 1500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में सुपरटेक की अटकी परियोजनाओं के निर्माण कार्य की धीमी गति पर कड़ी नाराजगी जताई है। ...और पढ़ें
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण कार्य की सुस्त चाल पर कड़ी नाराजगी जताई। AI जनरेटेड इमेज
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक परियोजनाओं की धीमी गति पर नाराजगी जताई।
न्यायालय ने स्वतंत्र रिसीवर नियुक्त करने पर विचार के संकेत दिए।
1500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर भी गंभीरता से विचार संभव।
जागरण संवाददाता, नोएडा। नोएडा में सुपरटेक लिमिटेड की 16 अटकी हुई परियोजनाओं और सुपरनोवा प्रोजेक्ट के हजारों घर खरीदारों की समस्याओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण कार्य की सुस्त चाल पर कड़ी नाराजगी जताई है।
वहीं, सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मौखिक रूप से बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, नथिंग इज हैपनिंग यानी जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं हो रहा है। इसके साथ ही न्यायालय ने मौजूदा कमेटियों को भंग करने और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक स्वतंत्र रिसीवर नियुक्त करने के विकल्प पर विचार करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
ये मुद्दा भी प्रमुखता से उठा
अदालत ने घर खरीदारों के संगठन और अन्य संबंधित पक्षों को आगे की कार्ययोजना पर आधारित एक पृष्ठ का ठोस प्रस्ताव अगली सुनवाई से पहले पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत में एक निवेशक द्वारा कथित तौर पर 1500 करोड़ का निवेश कर परियोजनाओं को पूरा कराने के प्रस्ताव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।
खरीदारों ने इस पर हो रही देरी पर चिंता जताते हुए जांच की मांग की, जिस पर न्यायालय ने संकेत दिया कि यदि निवेश का प्रस्ताव वास्तविक और विश्वसनीय पाया जाता है, तो उस पर विचार किया जा सकता है।
कोई अपेक्षित प्रगति नहीं हुई
वहीं, सुनवाई के दौरान घर खरीदारों की ओर से न्यायालय को बताया गया कि नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनबीसीसी) ने अदालत के सामने परियोजनाओं को युद्धस्तर पर पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन धरातल पर कोई अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।
खरीदारों ने एनबीसीसी द्वारा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) के प्रावधानों से मांगी जा रही छूट का पुरजोर विरोध किया और कहा कि कानूनी अधिकारों व हितों की सुरक्षा सर्वोपरि रहनी चाहिए।
30 करोड़ से अधिक खर्च
प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कमेटियों और सलाहकारों की फीस तथा संबंधित खर्चों पर कथित तौर पर 30 करोड़ से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, जबकि निर्माण कार्य शुरू होने को लेकर कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
इसके अलावा एनबीसीसी न्यूनतम 100 करोड़ की सीड फंड व्यवस्था करने की अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी पूरी करने में भी नाकाम रहा है। नेफोवा अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का स्वागत करते हुए कहा कि कमेटी और एनबीसीसी के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (पीएमसी) के तहत अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, ऐसे में 1500 करोड़ के निवेशक का प्रस्ताव एक बड़ा अवसर हो सकता है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
