सुपरटेक के हजारों खरीदारों को कब मिलेगा घर? सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी; NBCC भी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहा
सुपरटेक की अधूरी परियोजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने NBCC की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई, जबकि हजारों खरीदार घरों का इंतजार ...और पढ़ें

एनबीसीसी को निर्माण शुरू करने के निर्देश दिए जाने के करीब दो वर्ष बाद भी किसी परियोजना में काम शुरू नहीं हो पाया है। एआई इमेज
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक परियोजनाओं पर NBCC की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई।
NBCC ने RERA प्रावधानों से छूट मांगी, निर्माण कार्य रुका।
खरीदार अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस प्रगति चाहते हैं।
जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। सुपरटेक की अधूरी आवासीय परियोजनाओं में घर मिलने का इंतजार कर रहे हजारों खरीदारों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान परियोजनाओं को पूरा करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की गई।
नेफोवा के अनुसार, राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) को निर्माण शुरू करने के निर्देश दिए जाने के करीब दो वर्ष बाद भी किसी परियोजना में काम शुरू नहीं हो पाया है। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
कुछ प्रावधानों और अनुपालनों से छूट मांगी
सुनवाई के दौरान आम्रपाली मामले की तर्ज पर सुपरटेक की परियोजनाओं के लिए कोर्ट रिसीवर नियुक्त करने और एपेक्स कोर्ट कमेटी (एसीसी) को भंग करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। भारत के अटार्नी जनरल ने एनबीसीसी की ओर से अदालत को बताया कि निगम ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत याचिका दायर कर करीब छह महीने के लिए रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के कुछ प्रावधानों और अनुपालनों से छूट मांगी है, ताकि निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा सके।
निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका
इस अवधि के बाद स्थिति की समीक्षा की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को परियोजनाएं पूरी करने के लिए अपने सुझाव और प्रस्ताव एक-एक पृष्ठ के दस्तावेज में दाखिल करने का निर्देश दिया। नेफोवा की ओर से अधिवक्ता डाॅ. सूरत सिंह और कुमार मिहिर ने घर खरीदारों का पक्ष रखा। संस्था के अनुसार, एनबीसीसी को निर्माण की जिम्मेदारी देने के निर्देशों के बाद करीब 20 से 22 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद परियोजनाओं में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी
नेफोवा ने अदालत के निर्देशानुसार प्रस्ताव तैयार कर उसे घर खरीदारों के साथ साझा करने की बात कही है। संस्था की प्रमुख मांग है कि निर्माण की जिम्मेदारी एनबीसीसी को दी जाए और परियोजनाओं की निगरानी के लिए आम्रपाली मामले की तरह कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया जाए। नेफोवा का मानना है कि इससे निर्माण कार्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने को तैयार
सुनवाई के दौरान सुपरटेक अपकंट्री की ओर से पेश अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने एक फाइनेंसर का नाम प्रस्तावित किया, जो परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराने को तैयार है। सुप्रीम कोर्ट ने उनसे स्पष्ट करने को कहा कि क्या फाइनेंसर उस स्थिति में भी धन उपलब्ध कराएगा, जब परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उसकी पसंद के व्यक्ति के बजाय किसी स्वतंत्र व्यक्ति या एनबीसीसी को सौंपी जाए।
खरीदारों को नहीं चाहिए सिर्फ आश्वासन
नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने कहा कि लंबे समय से घरों का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों के लिए हर सुनवाई में नए विकल्पों पर चर्चा होना, लेकिन अंतिम समाधान का इंतजार बने रहना निराशाजनक है। खरीदारों को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निर्माण शुरू होने, समय-सीमा तय होने और घरों का कब्जा मिलने की दिशा में ठोस प्रगति चाहिए।
